ईरान के खिलाफ युद्ध से नाराज होकर ट्रंप के खास ने साथ छोड़ा, जानें-जोसेफ केंट कौन हैं?…

अमेरिका के टॉप काउंटरटेररिज्म अधिकारी जो केंट ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी अंतरात्मा के खिलाफ अमेरिका के ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते।

केंट ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया। इस खत को उन्होंने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को संबोधित किया था।

उन्होंने लिखा, “मैं अपने होशो हवास में ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान ने हमारे देश के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं पैदा किया था और यह भी जाहिर है कि हमने इस जंग की शुरुआत इजरायल और उसके शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में की।”

यह इस्तीफा ट्रंप प्रशासन में ईरान युद्ध के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

कौन हैं जो केंट ?

जो केंट 45 साल के हैं और वे अमेरिकी आर्मी स्पेशल फोर्सेस के पूर्व सैनिक हैं। उन्होंने 11 बार अमेरिका की ओर से जंग में हिस्सा लिया है। इराक युद्ध में उन्होंने खुद को झोंक दिया था। उनकी पहली पत्नी शैनन केंट नौसेना की क्रिप्टोलॉजिक टेक्निशियन थीं। 2019 में सीरिया में उनकी आत्मघाती हमले में उनकी मौत हो गई थी।

सैन्य सेवा के बाद केंट ने सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) में पैरामिलिट्री ऑफिसर के तौर पर काम किया। फिर उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वे दो बार रिपब्लिकन पार्टी से वाशिंगटन राज्य के दक्षिण-पश्चिमी इलाके से कांग्रेस का चुनाव लड़ चुके हैं।

2022 और 2024 में दोनों बार उन्हें मध्यमार्गी डेमोक्रेट मैरी ग्लूसेंकैंप पेरेज से हार मिली। ट्रंप ने दोनों चुनावों में उनका समर्थन किया था।

ईरान युद्ध पर इस्तीफे की वजह क्या है?

केंट ने इस्तीफा पत्र में कहा कि वे ट्रंप के पुराने विदेश नीति एजेंडे के समर्थक रहे हैं। ट्रंप ने पिछले तीन राष्ट्रपति चुनावों में वादा किया था कि अमेरिका को ‘कभी न खत्म होने वाले युद्धों’ से दूर रखेंगे। उन्होंने इराक और अफगानिस्तान जैसे युद्धों को जाल बताया था।

केंट लिखते हैं, “जून 2025 तक आप समझते थे कि मध्य पूर्व के युद्ध अमेरिका के लिए फंदा हैं। इन युद्धों ने हमारे देश के सच्चे सैनिकों की कीमती जानें लीं और राष्ट्र की संपत्ति तथा समृद्धि को नुकसान पहुंचाया।” लेकिन अब ट्रंप को गुमराह कर दिया गया। केंट का आरोप है कि मीडिया, इजरायल के उच्च अधिकारी और लॉबी ने मिलकर यह भ्रम फैलाया कि ईरान अमेरिका के लिए तत्काल खतरा है और जल्दी हमला करके आसानी से जीत हासिल की जा सकती है।

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