भारत और अफगानिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने रक्षा बजट में की बड़ी बढ़ोतरी, जानिए सेना, हथियारों और सुरक्षा मदों पर कितना होगा खर्च…

पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने रक्षा बजट में एक बार फिर बढ़ोतरी की है।

नेशनल असेंबली में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने रक्षा क्षेत्र के लिए तीन ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का प्रावधान घोषित किया। लगातार बढ़ते क्षेत्रीय तनाव, सीमाई चुनौतियों और सैन्य आधुनिकीकरण की जरूरतों को इस फैसले का प्रमुख आधार बताया गया है।

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाकिस्तान के रक्षा खर्च में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ते बजट का असर केवल सुरक्षा नीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की आर्थिक प्राथमिकताओं पर भी इसका प्रभाव दिखाई देगा।

पिछले वर्षों की तुलना में कितना बढ़ा रक्षा बजट

वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान ने रक्षा बजट को 20.2 प्रतिशत बढ़ाकर 2,550 अरब पाकिस्तानी रुपये किया था, जिसे बाद में संशोधित कर 2,595 अरब रुपये कर दिया गया। इससे पहले 2024-25 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 7.63 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया था।

अगर पिछले तीन वर्षों का रुझान देखा जाए तो पाकिस्तान के रक्षा बजट में कुल मिलाकर लगभग 3.16 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा वित्त वर्ष में कुल राष्ट्रीय बजट का लगभग 16.67 प्रतिशत हिस्सा रक्षा क्षेत्र को आवंटित किया गया है।

बड़ा हिस्सा पूर्व सैनिकों के लिए

पाकिस्तान के बजट ढांचे में सैन्य पेंशन रक्षा बजट का हिस्सा नहीं मानी जाती। बजट दस्तावेजों के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन के लिए 4.20 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया है, जिसमें से लगभग 2.95 अरब डॉलर केवल सेवानिवृत्त सैनिकों की पेंशन पर खर्च किए जाएंगे।

इस व्यवस्था के कारण वास्तविक सैन्य व्यय केवल घोषित रक्षा बजट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पेंशन मद को जोड़ने पर कुल खर्च और अधिक हो जाता है।

रक्षा बजट का पैसा कहां होगा खर्च

नए बजट में कर्मचारियों से जुड़े खर्चों के लिए लगभग 3.48 अरब डॉलर निर्धारित किए गए हैं। इसमें सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन, भत्ते तथा अन्य मानव संसाधन संबंधी व्यय शामिल हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत से अधिक है।

इसके अलावा नियमित परिचालन खर्चों के लिए 2.67 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि रखी गई है। इसमें परिवहन, चिकित्सा सुविधाएं, राशन, प्रशिक्षण, ईंधन और अन्य दैनिक संचालन संबंधी खर्च शामिल हैं।

सबसे बड़ा इजाफा सैन्य उपकरणों और भौतिक संपत्तियों पर होने वाले खर्च में किया गया है। इसके लिए 3.33 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 39 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्शाता है। इस राशि का उपयोग हथियारों, आधुनिक सैन्य उपकरणों और गोला-बारूद की खरीद पर किया जाएगा।

सार्वजनिक निर्माण कार्यों, सैन्य ढांचे के रखरखाव और नई सुविधाओं के निर्माण के लिए भी 1.21 अरब डॉलर निर्धारित किए गए हैं।

सरकार ने बढ़ोतरी को सुरक्षा जरूरतों से जोड़ा

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता और बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए रक्षा बजट में पर्याप्त वृद्धि आवश्यक थी। उन्होंने दावा किया कि हालिया क्षेत्रीय परिस्थितियों ने देश की सैन्य तैयारी और रक्षा क्षमता को मजबूत बनाए रखने की जरूरत को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

सरकार का कहना है कि बदलती चुनौतियों के बीच आधुनिक तकनीक और सैन्य संसाधनों में निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।

बदलते युद्ध के स्वरूप ने बढ़ाई चुनौतियां

रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) खालिद नईम लोधी का मानना है कि आधुनिक युद्ध अब पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गए हैं। उनके अनुसार साइबर युद्ध, ड्रोन तकनीक, मिसाइल सिस्टम, लेजर आधारित हथियार और रिमोट कंट्रोल सैन्य तकनीक भविष्य के संघर्षों की दिशा तय कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए नई तकनीकों को अपनाए बिना अपनी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। नौसेना, वायुसेना और थलसेना की आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार निवेश आवश्यक है।

भारत और अफगानिस्तान के साथ तनाव का भी असर

खालिद नईम लोधी के अनुसार पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौतियां केवल एक सीमा तक सीमित नहीं हैं। उनका कहना है कि भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव के अलावा अफगानिस्तान सीमा पर भी हालात जटिल बने हुए हैं, जिससे रक्षा तैयारियों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने यह भी माना कि यदि क्षेत्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकले और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में सुधार हो, तो रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा गरीबी उन्मूलन और विकास कार्यों में लगाया जा सकता है।

आर्थिक चुनौतियों के बीच रक्षा खर्च पर जारी रहेगी बहस

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कई वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा बजट में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर बहस तेज होना स्वाभाविक माना जा रहा है। एक पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता मानता है, जबकि दूसरा पक्ष शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में अधिक निवेश की जरूरत पर जोर देता है।

फिलहाल सरकार का रुख स्पष्ट है कि मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए रक्षा क्षेत्र में निवेश उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *