दुनियाभर में इस समय बारूद की गंध फैली है।
रूस-यूरेन का खतरनाक युद्ध हो, इजरायल का ईरान और गाजा के साथ खूनी टकराव, या फिर हाल ही में शांति समझौते के ठंडे बस्ते में गया अमेरिका और ईरान के बीच तनाव। हर तरफ हालात नाजुक हैं।
महाशक्तियां समझ चुकी हैं कि आने वाले समय में युद्ध के मैदान पूरी तरह बदलने वाले हैं।
इसी बीच, अमेरिकी वायुसेना ने भविष्य के हवाई युद्ध की परिभाषा बदलने के लिए एक बेहद गुप्त और आक्रामक योजना पर काम शुरू कर दिया है। अमेरिका ‘एयर फोर्स लॉन्ग रेंज वेपन’ (AFLRW) प्रोग्राम के तहत एक ऐसी महाविनाशक मिसाइल तैयार कर रहा है, जो 1,850 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को आसमान में ही नेस्तनाबूद कर देगी।
क्या खतरनाक योजना बना रहा अमेरिका?
इस बात को ऐसे समझिए कि हवाई युद्ध के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने के लिए अमेरिकी वायुसेना एक बेहद खतरनाक और लंबी दूरी के मिसाइल प्रोग्राम पर काम कर रही है। अमेरिका ‘एयर फोर्स लॉन्ग रेंज वेपन’ (AFLRW) प्रोग्राम के तहत एक ऐसी मिसाइल तैयार कर रहा है, जो कम से कम 1,000 नॉटिकल मील यानी लगभग 1,850 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को पलक झपकते ही तबाह कर देगी।
इस महाविनाशक मिसाइल की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अमेरिकी वायुसेना 25-26 अगस्त 2026 को एगलिन एयरफोर्स बेस पर रक्षा उद्योग के दिग्गजों के साथ एक बेहद गुप्त बैठक करने जा रही है।
आसमान में ही होगा दुश्मन का काम तमाम
बता दें कि इस प्रोग्राम के तहत हवा-से-हवा और हवा-से-जमीन दोनों तरह से वार करने वाली मिसाइलें बनाई जाएंगी। लेकिन अमेरिका की पहली प्राथमिकता हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल बनाने की है, ताकि आसमान में ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों का सफाया किया जा सके।
ऐसे में सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि 1,850 किलोमीटर की रेंज वाली हवा-से-हवा मिसाइल दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। इसके अलावा मौजूदा समय में दुनिया की सबसे आधुनिक मिसाइलें भी इसके आगे कहीं नहीं टिकती हैं।
| देश और मिसाइल | अधिकतम मारक क्षमता (रेंज) |
| प्रस्तावित अमेरिकी AFLRW | 1,850+ किलोमीटर |
| चीन की PL-17 | लगभग 400 किलोमीटर |
| रूस की R-37M | लगभग 300 किलोमीटर |
| भारत की अस्त्र फैमिली | 160 से 350 किलोमीटर |
| यूरोप की मीटियर | लगभग 200 किलोमीटर |
| चीन की PL-15 | लगभग 200 किलोमीटर |
| अमेरिका की वर्तमान AIM-260 (JATM) | 200+ किलोमीटर |
ड्रैगन के लिए अमेरिका की खास तैयारी
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका को इस बेहद लंबी दूरी की मिसाइल की जरूरत प्रशांत महासागर क्षेत्र की विशाल भौगोलिक दूरी को देखते हुए पड़ रही है। दरअसल, चीन लगातार अपनी मिसाइलों की रेंज बढ़ाकर अमेरिकी सेना के लिए खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे में अमेरिका इतनी लंबी दूरी का हथियार बनाकर युद्ध की स्थिति में चीन पर भारी बढ़त हासिल करना चाहता है।
दूर छिपे दुश्मन को कैसे ढूंढेगी मिसाइल?
रिपोर्टस के अनुसार पृथ्वी की गोलाई के कारण आसमान में उड़ने वाले आधुनिक रडार विमान (AWACS या AEW&C) भी अधिकतम 550 किलोमीटर से दूर नहीं देख सकते। ऐसे में सवाल उठता है कि यह मिसाइल 1,850 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को कैसे निशाना बनाएगी?
अब इसको लेकर विशेषज्ञ की राय की बात करें तो ‘सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज’ के महानिदेशक और एयर वाइस मार्शल अनिल गोलानी का कहना है कि यह तकनीक आज के दौर में बिल्कुल मुमकिन है।
आधुनिक युद्ध में क्या-क्या संभव?
गोलानी ने आगे इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युद्ध अब ‘किल वेब’ यानी नेटवर्क-सेंट्रिक सिस्टम पर आधारित हैं। इसमें केवल एक विमान का रडार नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स, जमीन पर मौजूद रडार और अन्य लड़ाकू विमान आपस में जुड़े होते हैं। ये सभी मिलकर दुश्मन की लोकेशन मिसाइल को भेजेंगे और उसे गाइड करेंगे।
और क्या-क्या कर रहा अमेरिका?
गौरतलब है कि दुनियाभर में जारी कई युद्धों के बीच अब अमेरिका इस काम के लिए अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के एक बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल करने पर भी काम कर रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका का यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में दुश्मन के विमानों को भनक लगे बिना ही, उन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर से हवा में उड़ाया जा सकेगा।