शीत युद्ध के दौर की हथियार वारथॉग हॉर्मुज स्ट्रेट में फिर से सुर्खियां बटोर रही है।
अमेरिकी वायुसेना का A-10 थंडरबोल्ट II को वारथॉग भी कहा जाता है, अपनी विशाल 30 एमएम जीएयू-8/A एवेंजर तोप के साथ दुश्मन के तेज हमलावर नौकाओं का शिकार करता है।
जो लोग इसे रिटायर करना चाहते थे, उनकी सारी योजनाएं इसकी मौजूदा भूमिका ने धराशायी कर दी हैं।
जब यह तोप चलती है, तो उसकी मशहूर ब्रर्र्र्ट आवाज जमीन पर लड़ रहे सैनिकों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।
रिटायरमेंट की अफवाहों के बीच हॉर्मुज में तबाही
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत A-10 हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरानी आईआरजीसी की तेज हमलावर नौकाओं और माइन-लेयर जहाजों का शिकार कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वारथॉग अब दक्षिणी फ्लैंक पर सक्रिय है, जहां यह छोटी, चपल नौकाओं पर जीएयू-8 से हमला कर रहा है।
कांग्रेस ने हाल ही में A-10 को रिटायर करने की वायुसेना की कोशिशों पर रोक लगाई थी। अब यह पुराना टैंक-किलर समुद्री भूमिका में नई जान डाल रहा है।
APKWS रॉकेट्स, AGM-65 मेवरिक मिसाइल्स और AIM-9 साइडवाइंडर के साथ यह लंबे समय तक हवा में टिक सकता है और ऐसे लक्ष्यों पर हमला कर सकता है।
शीत युद्ध में तोप की तलाश
1970 के नवंबर में अमेरिकी वायुसेना ने एक 30 एमएम रैपिड-फायर तोप बनाने के लिए अनुरोध किया। यह तोप नई क्लोज एयर सपोर्ट (CAS) मशीन के लिए थी, जिसका मकसद टैंक मारना, कठोर बंकरों को भेदना और कम ऊंचाई पर धीमी उड़ान में दुश्मन के इलाके में टिके रहना था।
खास बात यह थी कि पहले कोई विमान नहीं था जिसके लिए तोप बन रही थी, बल्कि तोप के लिए विमान ढूंढा जा रहा था। 1971 के मध्य तक जनरल इलेक्ट्रिक और फिल्को फोर्ड को प्रोटोटाइप बनाने का ठेका मिला। इसे शुरू में जीएयू-8 कहा जाता था।
क्या है हथियार की खासियत?
वायुसेना ने सिर्फ तोप नहीं मांगी, बल्कि चार तरह की गोला-बारूद टैंक और बख्तरबंद वाहनों के लिए आर्मर पियर्सिंग इंसेंडियरी, कठोर ठिकानों के लिए हाई एक्सप्लोसिव इंसेंडियरी, सेमी आर्मर पियर्सिंग हाई एक्सप्लोसिव और सस्ती प्रैक्टिस राउंड भी तय कीं। ये अलग-अलग लक्ष्यों जैसे घूमते टैंक, छिपे हुए बंकर या भीड़ वाले वाहनों पर निर्णायक हमला करने के लिए डिजाइन की गईं।
तोप के इर्द-गिर्द बना विमान
A-X प्रोग्राम में नॉर्थ्रॉप का A-9A और रिपब्लिक का A-10A आमने-सामने आए। जीएयू-8 तैयार नहीं होने के कारण शुरुआती टेस्ट में M61A1 वल्कन तोप का इस्तेमाल किया गया। तोप जीएयू-9 जो ओरलिकॉन 304RF का लाइसेंस्ड वर्जन भी 1973 में जीएयू-8 से मुकाबला किया, लेकिन हार गई।
फरवरी 1974 में जीएयू-8 ने पहली बार हवा में फायर किया। टेस्ट क्रू ने 39,000 से ज्यादा राउंड दागे। उड़ान टेस्ट 25,000 फीट से लेकर ट्रीटॉप लेवल तक, 135 से 415 नॉट्स की स्पीड और 5G तक के लोड में किए गए। मकसद था। युद्धक्षेत्र में भरोसेमंद और सर्वाइव करने लायक साबित करना।
A-10 को तोप के इर्द-गिर्द ही डिजाइन किया गया। लैंडिंग गियर ऑफसेट किया, फ्यूजलाज में जगह बनाई और रिकॉइल को बैलेंस करने के लिए पूरा विमान संतुलित किया। अगर रिकॉइल ठीक से कंट्रोल न होता, तो विमान अपनी लाइन से भटक जाता।
A-10 एवेंजर की ताकत
यह सात-बैरल वाली गैटलिंग-स्टाइल हाइड्रॉलिक तोप है, जो 3,900 राउंड प्रति मिनट फायर कर सकती है। डिप्लेटेड यूरेनियम राउंड इस्तेमाल होते हैं, जो बख्तरबंद लक्ष्यों को चीर देते हैं।
A-10 में रिडंडेंट हाइड्रॉलिक्स, टाइटेनियम ‘बाथटब’ पायलट प्रोटेक्शन और एक इंजन पर भी उड़ने की क्षमता है। यह सब कम ऊंचाई और धीमी स्पीड पर सर्वाइव करने के लिए है, जहां तेज जेट नहीं टिक पाते।