अमेरिका ने रहस्योद्घाटन किया है कि चीन की ई-कामर्स की दिग्गज कंपनी अलीबाबा, इंटरनेट सर्च कंपनी बाइडू और कार निर्माता कंपनी बीवाईडी व निओ अपने लाभ का बड़ा हिस्सा चीन की सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) को देती हैं।
यह रहस्योद्घाटन विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत वाले देशों के बीच तनाव बढ़ाने का नया मामला बन सकता है। उल्लेखनीय है कि इनमें से कई कंपनियां भारत में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कार्य कर रही हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा के एक महीने से भी कम समय में सामने आई है। इस यात्रा में ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय रिश्तों के नई ऊंचाई पर पहुंचने का एलान किया था।
ताजा रिपोर्ट पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह भेदभावपूर्ण और अकारण दबाव पैदा करने वाली है। जबकि चीनी कंपनियों ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह अपनी रिपोर्ट को सही करे और गलत हरकतें बंद करे।
ताजा रिपोर्ट चीन की दिग्गज कंपनियों और वहां की सेना के गठजोड़ को दर्शाने वाली है। साथ ही अमेरिका और चीन में छिड़ी वैश्विक प्रतिद्वंद्विता को भी उजागर करती है। यह रिपोर्ट अमेरिका और उस जैसे चीन से मुश्किल महसूस करने वाले देशों के लिए चिंता पैदा करने वाली है।
इससे पहले चीन की टाप मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों- सीएक्सएमटी और वाइएमटीसी को भी चीन की सेना से संबंध रखने वाली कंपनियों के तौर पर सूचीबद्ध किया गया था।
इसी सूची में चीन की कई दिग्गज टेक कंपनियां भी शामिल हैं। इन्हीं में शामिल यूनीट्री नाम की कंपनी के साथ अमेरिका की दिग्गज एआइ चिपमेकर कंपनी एनवीडिया ने अत्याधुनिक रोबोट बनाने की परियोजना पर कार्य करने का एक जून को ही एलान किया है।