अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान शुरू करने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा है कि जो भी देश ईरान को वित्तीय संस्थानों, कारोबार, हवाई अड्डों या सरकारी इकाइयों के जरिये किसी तरह की ‘लाइफलाइन’ उपलब्ध कराएगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी नजर किन देशों पर है और उनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने बुधवार को ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान से पैदा हुए खतरे को अलग-थलग करने और उसे हराने के लिए अमेरिका को अपने सहयोगियों की जरूरत है। उन्होंने इसे ‘इकोनामिक डी-डे’ बताते हुए कहा कि यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और ईरान को अलग-थलग करने का अभियान होगा।
ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत को भी कमतर बताया। उनका कहना है कि अमेरिका में ऊर्जा उत्पादन बढ़ने और नए आपूर्ति मार्ग विकसित होने से दुनिया की इस समुद्री मार्ग पर निर्भरता पहले जैसी नहीं रही।
ट्रंप के मुताबिक, ईरान चाहता था कि कच्चे तेल की कीमतें 350 डालर प्रति बैरल तक पहुंच जाएं, लेकिन अमेरिका और दूसरे देशों में उत्पादन बढ़ने के कारण ऐसा नहीं हो सका। तेल की कीमतें फिलहाल करीब 84-85 डालर प्रति बैरल के आसपास हैं।
ईरान ने किया पलटवारईरान ने ट्रंप की धमकी को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिकी आर्थिक दबाव से उसे झुकाया नहीं जा सकेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर कहा कि ट्रंप का तथाकथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ अमेरिका के अपने आर्थिक संकट से ध्यान हटाने की कोशिश है।
अराघची ने अमेरिका के बढ़ते कर्ज और ब्याज लागत का हवाला देते हुए कहा कि असफल नीतियों को और आगे बढ़ाने से अमेरिका को केवल और बड़ी हार मिलेगी। उन्होंने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा भी बताया।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आइआरजीसी) ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है। आईआरजीसी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि अगर क्षेत्र में फिर से सैन्य टकराव शुरू हुआ तो ईरान पहले से अधिक विनाशकारी हथियारों का इस्तेमाल करेगा।
उन्होंने दावा किया कि ईरानी मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले वारहेड की क्षमता पिछली लड़ाइयों में इस्तेमाल किए गए हथियारों से कहीं अधिक है।
बुल्गारिया और साइप्रस तक हमले की तैयारी
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी संभावित निशाने के रूप में चिह्नित किया है। इनमें बुल्गारिया और साइप्रस के ठिकाने भी शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का विस्तार करता है तो तेहरान क्षेत्र से बाहर जाकर भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
वार्ता को सरेंडर नहीं मानता ईरान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और बातचीत में वह कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहा है।
पेजेश्कियान के मुताबिक, ईरान का उद्देश्य आर्थिक नाकेबंदी हटवाना, विदेशों में फंसी अपनी संपत्तियां मुक्त कराना और परमाणु मुद्दे पर बातचीत करना है।
खाड़ी से सेना घटाने पर विचार
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, ईरान युद्ध की बढ़ती लागत को देखते हुए पेंटागन खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करने पर विचार कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में करीब 40,000 अमेरिकी सैनिक और जार्डन से ओमान तक लगभग 20 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें बड़ी मात्रा में सैन्य साजोसामान और स्थायी ढांचे मौजूद हैं। रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि ईरान युद्ध के कारण सितंबर तक अमेरिका को करीब 37.5 अरब डालर का नुकसान हो सकता है।