अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हालिया सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी लगातार तीखी होती जा रही है।
ट्रंप ने अपने इंटरनेट मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान को निशाना बनाकर 1,000 मिसाइलें “लॉक्ड एंड लोडेड” स्थिति में तैनात हैं।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, उन्होंने कहा कि यदि ईरानी सरकार ने उन्हें निशाना बनाया या ऐसा करने की कोशिश की तो अमेरिका और भी व्यापक सैन्य कार्रवाई करेगा।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना को पहले ही आवश्यक आदेश दिए जा चुके हैं और जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने की क्षमता मौजूद है।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि यह पूरे ईरान की इच्छा है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
अल जजीरा के मुताबिक, उन्होंने कहा- ‘मैं अपने पिता के बेगुनाह खून का बदला जरूर लूंगा, यही हमारे देश की भी इच्छा है।’ वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उन पर या अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व पर हमला हुआ तो उसका जवाब अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई से दिया जाएगा।
ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा, “हम बलिदानी नेता और सभी बलिदानियों के खून का बदला लेने की शपथ लेते हैं।” उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेगा।
मोजतबा ने हाथ से लिखे संदेश में आगे कहा, ‘यह मामला न तो मेरे व्यक्तिगत अस्तित्व पर और न ही अन्य अधिकारियों के अस्तित्व पर निर्भर करता है। हम मौजूद हों या न हों यह होकर रहेगा।’
हाल ही में अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका और ट्रंप विरोधी नारे तथा पोस्टर भी देखने को मिले थे। अमेरिका ने होर्मुज पर ईरान से मांगी गारंटी तनाव का एक बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है।
रॉयटर के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने की मांग की है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले नहीं करेगा और सभी नौवहन मार्ग बिना किसी शुल्क के खुले रहेंगे।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि ईरान ऐसा आश्वासन नहीं देता है तो वार्ता के सकारात्मक नतीजे निकलना मुश्किल होगा। हालांकि तेहरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण उसका अधिकार है और वहां होने वाली गतिविधियों का फैसला वही करेगा।
अराघची ने एक्स पर लिखा कि असलियत यह है कि आपसी सहमति से ही समझौते का पालन हो सकता है।इस बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।
प्रेट्र के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को ओमान पहुंचे, जहां उनके ओमानी समकक्ष से मुलाकात प्रस्तावित है। इससे पहले कतर ने भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिश की थी।
वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और कतर के नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू कराने और क्षेत्रीय शांति बहाल करने की अपील की है।
ट्रंप के आदेश स्वत: लागू नहीं होंगे, उपराष्ट्रपति फैसला लेंगे
ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान उनकी हत्या करता है, तो उन्होंने पहले से जवाबी हमले के निर्देश दे रखे हैं। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत ऐसा कोई स्वत: लागू होने वाला आदेश नहीं होता।
अगर किसी राष्ट्रपति की हत्या होती है, तो अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और 1947 के प्रेसिडेंशियल सक्सेशन एक्ट के तहत उपराष्ट्रपति तुरंत राष्ट्रपति और सेना के सर्वोच्च कमांडर बन जाते हैं।
ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पास यह फैसला करने का अधिकार होगा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाए या नहीं। वे ट्रंप की इच्छा के मुताबिक कार्रवाई कर सकते हैं या कोई दूसरा रास्ता भी चुन सकते हैं।