इजरायल और ईरान के बीच 39 दिनों तक चले भीषण संघर्ष को खत्म हुए करीब डेढ़ महीना होने जा रहा है, लेकिन इस युद्ध की सैन्य लागत को लेकर नए खुलासे लगातार सामने आ रहे हैं।
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाने में अमेरिका ने अपने सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा सिस्टम ‘थाड’ (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) के करीब आधे इंटरसेप्टर इस्तेमाल कर दिए।
वाशिंगटन पोस्ट ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल की रक्षा में 200 से ज्यादा थाड इंटरसेप्टर दागे।
इसके अलावा पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों से 100 से अधिक स्टैंडर्ड मिसाइल-3 और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 भी छोड़ी गईं।रिपोर्ट के मुताबिक, इसके मुकाबले इजरायल ने अपेक्षाकृत कम संख्या में अपने इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए।
दागी 100 से अधिक मिसाइलें
इजरायल ने करीब 100 ऐरो इंटरसेप्टर और लगभग 90 डेविड स्लिंग इंटरसेप्टर दागे। इनमें से कुछ का उपयोग यमन और लेबनान में ईरान समर्थित समूहों की ओर से दागे गए रॉकेट और ड्रोन को रोकने में किया गया।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कुल मिलाकर अमेरिका ने इजरायल की तुलना में 120 ज्यादा इंटरसेप्टर दागे और दोगुनी ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर भविष्य में अमेरिका और इजरायल फिर से ईरान के साथ सीधे संघर्ष में उतरते हैं, तो अमेरिकी सेना को अपने मिसाइल भंडार का और बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ सकता है।
इसकी एक वजह यह है कि इजरायली सेना ने अपनी कुछ मिसाइल रक्षा बैटरियों को मरम्मत और रखरखाव के लिए फिलहाल आफलाइन कर दिया है।
हथियार का स्टॉक हुआ खाली
एक अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि यदि लड़ाई दोबारा शुरू होती है तो अमेरिका और इजरायल के बीच रक्षा संसाधनों का असंतुलन और बढ़ सकता है।
हालांकि, पेंटागन ने इस रिपोर्ट के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का बचाव किया। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शान पार्नेल ने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर एक बड़े और बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा हैं।
उनके मुताबिक ‘आपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान अमेरिका और इजरायल ने रक्षा का बोझ बराबरी से उठाया और लड़ाकू विमान, ड्रोन रोधी प्रणालियों तथा अन्य आधुनिक रक्षा क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल किया।
वाशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास ने भी संयुक्त सैन्य रणनीति का समर्थन करते हुए कहा कि ‘आपरेशन रोरिंग लायन’ और ‘आपरेशन एपिक फ्यूरी’ दोनों देशों के बीच बेहद करीबी समन्वय के साथ चलाए गए। दूतावास के अनुसार, अमेरिका के लिए इजरायल जैसा सैन्य तैयारी, साझा हित और क्षमता वाला दूसरा सहयोगी नहीं है।