बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जीएस पटेल के परिवार को पिछले 10 महीनों से दो महाद्वीपों में धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। यह सब दाऊदी बोहरा समुदाय में उत्तराधिकार के मुद्दे को सुलझाने वाले उनके 2024 के अहम फैसले से जुड़ा है। इस सिलसिले में सबसे हालिया घटना 5 जून को हुई।
मांग यह है कि जस्टिस (रिटायर्ड) पटेल एक यूट्यूब वीडियो में 23 अप्रैल, 2024 के अपने फैसले को वापस लें। पिछले हफ्ते 5 जून को लंदन में रहने वाली पटेल की बेटी अदिति पटेल को एक गुमनाम चिट्ठी मिली, जिसमें लिखा था, “आपको काफी चेतावनी दी गई थी। गैंग को पैसे दे दिए गए हैं। अगला कदम आपको और आपके परिवार को जलाकर मारना है। अगर आप पिछली चिट्ठी में बताई गई बात मान लें तो इस कॉन्ट्रैक्ट को रद किया जा सकता है। साथ में एक चिप दी गई है, जिसमें दिखाया गया है कि बात न मानने पर क्या होता है।”
फर्जी पते से भेजी गई चिट्ठी
माना जा रहा है कि यह चिट्ठी जर्मनी से भेजी गई थी। इस पर जर्मनी का स्टैम्प लगा है और इसे लंदन के एक फर्जी पते से भेजा था। चिट्ठी के साथ एक एसडी कार्ड भी था, जिसे हर्टफोर्डशायर पुलिस ने अपनी जांच के लिए जब्त कर लिया है।
हालांकि, परिवार ने अपने कंप्यूटर पर कार्ड को खोलने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे उनके सिस्टम खराब हो सकते हैं या उन पर किसी और का कब्जा हो सकता है।
जस्टिस पटेल ने क्या कहा?
जस्टिस पटेल ने कहा कि उन्होंने लंदन में भारतीय हाई कमिश्नर और बॉम्बे हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है और भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत को भी इस मामले की जानकारी दी है। उन्होंने आगे कहा, “मैं अप्रैल 2024 से रिटायर हो चुका हूं। बॉम्बे हाई कोर्ट के किसी फैसले को यूट्यूब वीडियो के जरिए बदला नहीं जा सकता।”
पिछले साल अगस्त में शुरू हुआ धमकियों का सिलसिला
धमकी और हिंसा का सिलसिला पिछले साल अगस्त में शुरू हुआ। जस्टिस पटेल की पत्नी मालाश्री पटेल को उनके मुंबई वाले घर पर एक चिट्ठी मिली। उसमें लिखा था, “हम DB (दाऊदी बोहरा) समुदाय के सदस्यों का एक ताकतवर ग्रुप हैं जो अपने समुदाय को न्याय दिलाने में दिलचस्पी रखते हैं… हमने एक बहुत काबिल और खतरनाक सिंडिकेट को काम पर लगाया है, जिसने लंदन में चेतावनी देने का काम किया।”
उस चिट्ठी पर न तो कोई दस्तखत था और न ही कोई तारीख। उसी समय लंदन में जस्टिस पटेल की बेटी अदिति पटेल को भी ऐसी ही एक चिट्ठी मिली, जिसमें अगस्त 2025 में लंदन के एक इलाके में उनके घर में हुई सेंधमारी की जिम्मेदारी भी ली गई थी।
जस्टिस पटेल की बेटी पर हमला
फिर, इस साल 22 अप्रैल को जब उनकी बेटी स्कूल जा रही थी तो एक नकाबपोश आदमी ने पीछे से आकर उस पर हमला कर दिया, जिससे उसकी नाक टूट गई और वह सड़क पर लहूलुहान हालत में पड़ी रही।
पटेल परिवार को भेजे गए पत्रों में इस बात के भी विस्तृत निर्देश दिए गए हैं कि रिटायर हो चुके जज को अपना फैसला कैसे वापस लेना चाहिए। इनमें एक यूट्यूब वीडियो रिकॉर्ड करना भी शामिल है, जिसमें यह कहा जाए कि उन्हें वह आदेश जारी करने के लिए मजबूर किया गया था और फिर उस वीडियो को मीडिया और बॉम्बे बार एसोसिएशन तक पहुंचाया जाए।
पिछले साल 9 सितंबर को मुंबई की गामदेवी पुलिस ने उस पत्र के आधार पर एक नॉन-कॉग्निजेबल (जिसमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती) शिकायत दर्ज की थी। लंदन में उनकी बेटी और दामाद ने यूके पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। वेस्ट हर्टफोर्डशायर की काउंटर-टेररिज्म यूनिट, अदिति पटेल पर 22 अप्रैल को हुए हमले की जांच कर रही है।
किस फैसले की वजह से मिल रही धमकियां
धमकी और हिंसा का यह कथित अभियान जस्टिस पटेल के 2024 के उस फैसले से शुरू हुआ है जिसमें तय किया गया था कि लाखों लोगों वाले दाऊदी बोहरा समुदाय का असली आध्यात्मिक प्रमुख कौन है। यह एक ऐसा मामला है जिसने समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया है।
2014 में मुंबई में दाऊदी बोहरा समुदाय के 52वें आध्यात्मिक और सांसारिक नेता सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया गया था। इसमें सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के बेटे सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को अगला ‘दाई-अल-मुतलक’ या सर्वोच्च नेता बनाए जाने को चुनौती दी गई थी।
चुनौती देने वाले उनके चाचा खुजैमा कुतुबुद्दीन थे और 2016 में उनकी मौत के बाद उनके चचेरे भाई ताहिर फखरुद्दीन ने यह केस आगे बढ़ाया। 23 अप्रैल 2024 को जस्टिस पटेल ने ताहिर फखरुद्दीन के नेतृत्व वाले कुतुबी बोहरा गुट के केस को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि ‘दैवीय अधिकार’ (ईश्वरीय अधिकार) का कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है और सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को ही सही 53वें ‘दाई अल-मुतलक’ के तौर पर मान्यता दी। इसके बाद फखरुद्दीन गुट ने इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की है।
ताहिर फखरुद्दीन के भाई और सैयदना ताहिर फखरुद्दीन के कम्युनिकेशन डायरेक्टर अजीज भाईसाहब कुतुबुद्दीन ने कहा, “सैयदना ताहिर फखरुद्दीन साहब ऐसी किसी भी धमकी और हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं। ये हरकतें साफ तौर पर हमें बदनाम करने और अपील को पटरी से उतारने की कोशिश हैं।”
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना की धार्मिक प्रथा से जुड़े एक और अहम मामले (सुनीता तिवारी बनाम भारत सरकार) की सुनवाई कर रही है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि FGM मानवाधिकारों और शारीरिक अखंडता का उल्लंघन है। इस मामले में शामिल पक्षों में ‘दाऊदी बोहरा विमेंस एसोसिएशन फॉर रिलीजियस फ्रीडम’ (DBWRF) भी है, जिसका कहना है कि FGM एक नुकसान न पहुंचाने वाली सांस्कृतिक प्रथा है।
धमकी में एफजीएम का भी जिक्र
जस्टिस पटेल के परिवार को भेजे गए एक पत्र में FGM मामले का भी जिक्र है। जस्टिस पटेल के बारे में इसमें कहा गया है, “आपकी कायरता की वजह से ही आरोपी (सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन गुट) समुदाय के लोगों पर हिंसा, धमकियां और जबरदस्ती के तरीके अपना पा रहा है ताकि उनसे ज्यादा से ज्यादा पैसे ऐंठ सके और उन्हें FGM जैसी बुरी प्रथाओं को मानने के लिए मजबूर कर सके। और सबसे अहम बात वह अपने फायदे के हिसाब से दाऊदी बोहरा समुदाय की असली मान्यताओं को बदल रहा है। हम इसे जारी नहीं रहने देंगे।”
जस्टिस पटेल ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को दी गई धमकियां बहुत सोच-समझकर दी गई हैं, जिसमें भारत और यूके के बीच अधिकार-क्षेत्र के बंटवारे का फायदा उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भले ही उन्होंने आधिकारिक तौर पर जरूरी प्रक्रिया का पूरी ईमानदारी से पालन किया, फिर भी उनके परिवार पर खतरा बना रहा।