देश के लिए 1962 (चीन), 1965 और 1971 (पाकिस्तान) के तीन बड़े युद्ध लड़ चुके 92 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी कैप्टन अब चौथी लड़ाई लड़ रहे हैं, इस बार अपनी ही जमीन बचाने के लिए।
कैप्टन चुन्नी लाल ठाकुर (हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निवासी) ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में मोहंगढ़ के पास इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में स्थित अपनी 25 बीघा कृषि भूमि घोटाले का शिकार होने का आरोप लगाया है।
कैप्टन ठाकुर पोंग डैम विस्थापित परिवार से हैं। पोंग डैम निर्माण के दौरान उनकी पैतृक भूमि अधिग्रहित होने के बाद सरकार ने उन्हें पुनर्वास योजना के तहत जैसलमेर में सिंचित कृषि भूमि आवंटित की थी। कई वर्षों से वे स्थानीय किसानों के माध्यम से इस जमीन पर खेती कराते थे और अपना हिस्सा प्राप्त करते थे।
जब उनके खेतिहर ने बताया कि जमीन किसी और के नाम बेच दी गई है, तब उन्हें इस घोटाले का पता चला। आरोप है कि 16 जून को बिना उनकी मौजूदगी के जाली दस्तावेजों के जरिए जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम रजिस्टर्ड कर दी गई और 26 जून को म्यूटेशन भी पूरा कर लिया गया।
कैप्टन ठाकुर हिमाचल से जैसलमेर पहुंचे और राजस्व कार्यालय व पुलिस में शिकायत की, लेकिन शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। तीन दिन पहले जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे के हस्तक्षेप के बाद सिटी कोतवाली थाने में धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
परिवार का आरोप
कैप्टन के बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर ने पूछा कि बिना फिंगरप्रिंट, फोटो या मालिक की मौजूदगी के कैसे रजिस्ट्रेशन हो गया? उन्होंने जाली आधार और पहचान दस्तावेजों का भी आरोप लगाया।
सैनिक विश्राम गृह प्रभारी रिटायर्ड एयरफोर्स सार्जेंट लाला राम ने कहा कि भूमि दलाल खासकर पोंग डैम विस्थापित परिवारों और दूर रहने वाले रिटायर्ड सैनिकों को निशाना बनाते हैं।
जैसलमेर एडिशनल एसपी रेवंतदान ने पुष्टि की कि धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।