₹5.15 लाख की अघोषित आय का आरोप खारिज, ITAT ने टैक्स विभाग को लगाई फटकार…

एक वरिष्ठ नागरिक महिला ने आयकर विभाग के खिलाफ नौ साल की लंबी लड़ाई के बाद बड़ी राहत हासिल की है। आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल जयपुर ने कर अधिकारी द्वारा लगाए गए 5.15 लाख अघोषित आय के आरोप को खारिज कर दिया।

महिला ने 14 मई 2007 को 2 लाख का दो साल का फिक्स्ड डिपॉजिट कराया था। यह एफडी 29 मई 2009 को मैच्योर हुआ और बैंक ने उसके खाते में 2.41 लाख क्रेडिट किए। इसी दौरान उसने 1.06 लाख नकद भी जमा किए। महिला का कहना था कि यह पैसा परिवार की पेंशन से जमा बचत है।

चूंकि महिला ने आयकर रिटर्न नहीं भरा था, इसलिए असेसिंग ऑफिसर ने 29 मार्च 2017 को धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया। महिला ने नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिसके बाद एओ ने धारा 144 के तहत बेस्ट जजमेंट असेसमेंट करते हुए उसकी कुल आय 5.15 लाख निर्धारित कर दी। इसमें शामिल थे

  • अनुमानित नियमित आय: 1.5 लाख
  • नकद जमा: 1.06 लाख
  • एफडी से जमा: 2.42 लाख
  • ब्याज आय: 16,940

महिला ने जेसीआईटी (ए) के सामने अपील की, लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं दिया। जेसीआईटी ने भी ₹5.15 लाख के एडिशन को बरकरार रखा। इसके बाद महिला आईटीएटी जयपुर पहुंची।

आईटीएटी जयपुर का फैसला

ट्रिब्यूनल ने 6 अगस्त 2026 को सुनवाई की और 21 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। आईटीएटी ने पाया कि:

  • एफडी के 2.42 लाख उसकी अपनी राशि थी, जो 2007 में जमा किए गए दो लाख से मैच्योर हुई थी। इसे अघोषित आय नहीं माना जा सकता।
  • 1.06 लाख नकद जमा के पीछे पिछले नकद निकासी (कुल ₹2.45 लाख) का सबूत था। महिला ने स्पष्टीकरण दिया और एओ के पास इसे गलत साबित करने का कोई सबूत नहीं था।
  • 1.5 लाख की अनुमानित आय पूरी तरह अनुमान और अटकलों पर आधारित थी, जिसके लिए कोई सबूत नहीं था।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि महज ITR न भरने या नोटिस का जवाब न देने के आधार पर आय नहीं जोड़ी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए आईटीएटी ने सभी एडिशन डिलीट कर दिए।

टैक्स एक्सपर्ट विपिन उपाध्याय का कहना है कि सीनियर सिटिजंस को टैक्सेबल इनकम न होने पर भी आईटीआर जरूर भरना चाहिए। बैंक एफडी, ब्याज और बड़े नकद जमा की जानकारी आयकर विभाग को देते हैं। अगर आईटीआर नहीं भरा तो विभाग बेस्ट जजमेंट असेसमेंट कर सकता है।

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