अमेरिका से बातचीत के बीच ईरान में अहमद वाहिदी की बढ़ी अहमियत, कट्टरपंथी गुट का प्रभाव हुआ मजबूत…

अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने को लेकर चल रही वार्ता में ईरान के कट्टरपंथी सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी की भूमिका तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।

ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख वाहिदी को अब अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के कठोर रुख का प्रमुख रणनीतिकार माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वाहिदी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के करीबी माने जाते हैं और युद्ध के बाद ईरानी सत्ता संरचना में उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा है।

फरवरी में अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि ईरान की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति तय करने में उनकी निर्णायक भूमिका है।

ईरान की सैन्य क्षमता

वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फार द स्टडी आफ वार के मुताबिक, वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने न केवल युद्ध के दौरान ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया पर नियंत्रण मजबूत किया है, बल्कि अमेरिका के साथ वार्ता की दिशा भी वही तय कर रहे हैं।

ईरान की रणनीति होर्मुज जलडमरूमध्य पर पकड़ बनाए रखने, तेल-गैस निर्यात बाधित करने और वैश्विक ऊर्जा संकट का दबाव बढ़ाने की रही है।रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की यह मांग कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़े, उसे लेकर भी वाहिदी सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

उनका मानना है कि अमेरिका लंबे टकराव से बचना चाहेगा क्योंकि खाड़ी में उसके सहयोगी देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।विश्लेषकों का कहना है कि वाहिदी की सोच “निरंतर प्रतिरोध” की नीति पर आधारित है।

न्यूयार्क स्थित थिंक टैंक ‘द सूफान ग्रुप’ के वरिष्ठ फेलो केनेथ काट्जमैन के मुताबिक, वाहिदी मानते हैं कि अमेरिका को हर स्तर पर चुनौती दी जानी चाहिए

।वाहिदी इसी साल रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख बनाए गए थे। इससे पहले वह कुद्स फोर्स का नेतृत्व कर चुके हैं, जिसने पश्चिम एशिया में ईरान समर्थित संगठनों का नेटवर्क खड़ा किया।

उन पर 1994 में अर्जेंटीना के यहूदी सामुदायिक केंद्र पर हुए बम धमाके और 1996 के सऊदी अरब के खोबार टावर्स हमले में भूमिका के आरोप भी लग चुके हैं, हालांकि ईरान इन आरोपों से इन्कार करता रहा है।

पाकिस्तान की भूमिका

2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन में भी वाहिदी की भूमिका रही थी। उस समय वह गृह मंत्री थे और सुरक्षा एजेंसियों के जरिए सख्त कार्रवाई कराई गई थी।

अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच हुई विफल वार्ता के बाद वाहिदी की भूमिका और मजबूत हो गई। इसके बाद संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और यहां तक कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी बातचीत की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत पीछे होते दिखाई दिए।

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