राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने रविवार को कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता का अर्थ है कि यह द्वीप न तो बीजिंग का है और न ही उसके अधीन है। केवल ताइवानी लोग ही अपने भविष्य का फैसला कर सकते हैं।
लाई ने अमेरिकी हथियारों की खरीद का भी बचाव किया और इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका से हथियारों की खरीद क्षेत्रीय संघर्ष और अस्थिरता को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।
लाई की ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी चिनफिंग के बीच बीजिंग में हुई शिखर बैठक के कुछ दिनों बाद आई हैं।
इस शिखर बैठक के बाद ताइवान के लिए अमेरिकी समर्थन को लेकर इस द्वीपीय देश में चिंताएं बढ़ गई थीं।
शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा था- ‘हम यह नहीं चाहते कि कोई हमसे कहे, चलो स्वतंत्र हो जाते हैं, क्योंकि अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है।
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इसे अपने नियंत्रण में लाने के लिए उसने बल प्रयोग के विकल्प से इनकार नहीं किया है।’
ताइवान ने किये कई दावे
एपी के अनुसार, लाई ने एक बयान में कहा कि ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री और दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा सहयोग न केवल कानूनी रूप से उचित हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए जरूरी भी है।
हम राष्ट्रपति ट्रंप को उनके पहले कार्यकाल से ही ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता की खातिर उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद देते हैं, जिसमें ताइवान को हथियारों की बिक्री में लगातार वृद्धि शामिल है।
अमेरिका में ताइवान के प्रतिनिधि अलेक्जेंडर युई ने चेतावनी दी कि चीनी आक्रमण को रोकने के लिए ताइवान को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति जरूरी है।
चीन के दबाव में ताइवान डब्ल्यूएचए से बाहर एएनआइ के अनुसार, ताइवान को एक बार फिर विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) से बाहर कर दिया गया है।
यह लगातार 10वां वर्ष है, जब चीन के दबाव के कारण ताइपे को इसमें भाग लेने से वंचित रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्णय लेने वाली संस्था की बैठक जेनेवा में होने वाली है।