जी7 देशों ने एक अहम निर्णय लिया है। उन्होंने अपने इमरजेंसी रिजर्व से लगभग 100 मिलियन बैरल यानी 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल बाजार में जारी पर सहमति बनाई है। इसके अलावा सभी सदस्य देशों ने यह भी आश्वासन दिया है कि वे ऊर्जा निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएंगे।
जी7 के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कदम ऊर्जा आपूर्ति और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अमेरिका में शुक्रवार को डीजल की औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। एएए के अनुसार, 22 सितंबर को यह 6.52 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।
यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव का नतीजा है। ट्रंप नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को कम करना चाहते हैं।
अमेरिका ने यूरोपीय संघ पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की थी। उसकी मांग थी कि यूरोपीय संघ अपने आपातकालीन डीजल भंडार को खोले।
ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो अमेरिका डीजल निर्यात बंद कर सकता है। यूरोप अब अमेरिकी डीजल पर काफी हद तक निर्भर हो चुका है, इसलिए ऐसी पाबंदी का यूरोप पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।
G7 के संयुक्त बयान में कहा गया है कि पहले पूरे हो चुके वादों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के माध्यम से 10 करोड़ बैरल तेल की समन्वित रिलीज की जाएगी। यानी सभी देश मिलकर एक साथ यह कदम उठाएंगे।
तेल भंडार खोलने का यह पहला अवसर नहीं है। ईरान युद्ध के बाद मार्च में आईईए के नेतृत्व में 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का समझौता हुआ था, जो अब तक की सबसे बड़ी आपातकालीन रिलीज मानी जाती है।