स्काईरूट की कामयाबी के बाद भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नई हलचल, रॉकेट-सैटेलाइट कंपनियां हुईं सक्रिय…

भारतीय प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री में इस समय एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ही प्रयास में ‘विक्रम-1’ रॉकेट को अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाकर दुनिया को चौंका दिया है।

कमाल की बात यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट स्पेस कंपनी स्पेसएक्स को भी यह कामयाबी तीन बार फेल होने के बाद मिली थी, जबकि स्काईरूट ने इसे पहली ही बार में कर दिखाया।

अन्य स्पेश स्टार्टअप्स कंपनियों ने कसी कमर

स्काईरूट की इस बड़ी जीत के बाद अब भारत के कई अन्य स्पेस स्टार्टअप्स भी अपने कमर्शियल (व्यावसायिक) सपनों को आसमान में उड़ान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी क्रम में स्काईरूट एयरोस्पेस इस साल के अंत तक विक्रम-1 का एक और टेस्ट करने जा रही है।

इसके अलावा एक बड़े योजना के तहत स्काईरूट अगले साल के अंत तक 1000 किलोग्राम वजन ले जाने वाले भारी रॉकेट ‘विक्रम-2’ को लॉन्च करने की तैयारी है। कंपनी का अंतिम लक्ष्य हर महीने एक रॉकेट बनाने का है।

अग्निकुल कॉस्मॉस की कैसी तैयार?

बता दें कि चेन्नई की यह कंपनी अगले एक साल में ‘मिशन 02’ लॉन्च करने की तैयारी में है। इसमें ग्राहकों के सैटेलाइट तो होंगे ही, साथ ही रॉकेट के निचले हिस्से को समंदर में एक तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर लैंड कराने की कोशिश भी की जाएगी।

कंपनी रॉकेट के ऊपरी हिस्से को अंतरिक्ष में ही छोड़कर उसे सैटेलाइट की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। अग्निकुल बहुत जल्द बैक-टू-बैक 3-4 मिशन करने की योजना बना रही है।

ईथरियलएक्स की तैयारियों के बारे में भी जानिए

बेंगलुरु की यह कंपनी ऐसे रॉकेट बना रही है जिन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सके, जिससे लॉन्चिंग का खर्च बहुत कम हो जाएगा। इस साल के अंत तक कंपनी अपने इंजनों के कड़े टेस्ट पूरे कर लेगी।

ध्रुव स्पेस नैनो सैटेलाइट्स पर काम कर रही

बता दें कि यह कंपनी छोटे और नैनो सैटेलाइट्स पर काम कर रही है। अगले साल से कंपनी हर महीने एक बड़ा सैटेलाइट और हर हफ्ते एक छोटा सैटेलाइट बनाने की रफ्तार पकड़ लेगी। अगले दो साल में इनके 22 सैटेलाइट अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार हैं।

पिक्सेल और दिगंतरा की तैयारियां कितनी खास?

पिक्सेल कंपनी 100 सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क तैयार कर रही है, जिसमें से 50 से ज्यादा सैटेलाइट्स पर अगले साल काम शुरू हो जाएगा। ये सैटेलाइट्स अंतरिक्ष से धरती की बेहद साफ और खास तस्वीरें लेंगे।

वहीं दिगंतरा अंतरिक्ष के ट्रैफिक और सुरक्षा पर नजर रखने के लिए 2027 तक 17 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजेगी। इस साल के अंत तक यह अंतरिक्ष से लाइव निगरानी का डेटा देना शुरू कर देगी।

गैलेक्सआई और टेकमी2स्पेस

गौरतलब है कि गैलेक्सआई ऐसे आधुनिक सैटेलाइट बना रही है जो बादलों और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकेंगे। वहीं दूसरी ओर टेकमी2स्पेस अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने पर काम कर रही यह कंपनी अब विदेशी रॉकेटों के बजाय भारत के स्काईरूट रॉकेट को अपनी पहली पसंद बनाएगी। इनका लक्ष्य 2033 तक 20000 सैटेलाइट्स भेजने का है।

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