प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों के माध्यम से मौजूदा ई-20 स्तर से अधिक पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की अनुमति देने के लिए काम कर रही है।
‘द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कान्फ्रेंस 2026’ के चौथे संस्करण में कपूर ने कहा कि ई-20 कार्यक्रम अब तक बहुत सफल रहा है और कई वाहन कंपनियों ने फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना बनाई है।
कपूर ने कहा- ‘अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और हमें ऐसे ब्लेंडिंग यानी मिश्रण की मंजूरी देनी है जो ई-20 से अधिक हो।’ इसके साथ ही, उन्होंने ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
बता दें कि ई-20 एक मिश्रित पेट्रोल है जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथनॉल होता है।
कपूर ने कहा कि बायोफ्यूल और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और सरकार की नीतियां अब बड़े पैमाने पर बायोफ्यूल को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है।
इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डालर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है।
उन्होंने कहा- ‘यह जरूरी है कि हम देश में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें।’ उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है। इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।
ई-20 की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह ज्यादातर गलत जानकारी के कारण है। उन्होंने कहा कि बहुत सारे अध्ययन किए गए हैं, बहुत सारे प्रयोग किए गए हैं और यह सामने आया है कि ई-20 बहुत अच्छी तरह से काम करता है। कहीं थोड़ी ईंधन दक्षता में कमी आती भी है तो यह उच्च आक्टेन के साथ संतुलित हो जाती है।
डीजल खंड के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनाल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं तो यह जैव-ईंधन के लिए एक ‘बड़ा’ नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है।
क्या हैं फ्लेक्सी फ्यूल गाड़ियां
फ्लेक्सी फ्यूल गाड़ियां ऐसे वाहन हैं जिनके इंजन पेट्रोल और एथनॉल (गन्ने या अनाज से बना वैकल्पिक ईंधन) के अलग-अलग मिश्रण पर चल सकते हैं। ये गाड़ियां आमतौर पर ई20 (20% एथनॉल) से लेकर ई85 (85% एथनॉल और 15% पेट्रोल) या 100% शुद्ध एथनॉल (ई100) तक के मिश्रण पर काम करने के लिए डिजाइन की जाती हैं।