सीबीएसई कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणामों के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ी चिंताओं और असमंजस की स्थिति के मद्देनजर शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है।
इसने स्पष्ट किया है कि नई डिजिटल ‘आन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भी नई मूल्यांकन पद्धति को लेकर फैली घबराहट पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि छात्रों का हित और मानसिक सुकून उसके लिए सर्वोपरि है। इसने कहा कि ओएसएम को छात्रों की सहूलियत और निष्पक्षता के लिए ही लागू किया गया है।
अनुभवी शिक्षकों ने तैयार की व्यवस्था
अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार की गई इस व्यवस्था से मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता आती है। एक प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि इस बार कुल 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मार्किंग की वजह से पास प्रतिशत में गिरावट आने की आशंकाएं निराधार हैं।
इस साल 12वीं का पास प्रतिशत पिछले साल के 88 प्रतिशत से घटकर 85 प्रतिशत रहा है, लेकिन इसका तकनीक से कोई सीधा संबंध नहीं है।
स्कै¨नग के दौरान सुरक्षा के तीन कड़े स्तरों का पालन किया गया, जिससे टोट¨लग (अंकों को जोड़ने) में होने वाली मानवीय गलतियों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई है।
शिक्षा सचिव ने बताया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में छात्रों द्वारा बहुत हल्की स्याही (लाइट इंक) का उपयोग किया गया था, जिससे बार-बार स्कैन करने के बाद भी वे पढ़ने योग्य नहीं थीं।
ऐसे मामलों में छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए लगभग 13 हजार उत्तर पुस्तिकाओं को अलग से पहचानकर शिक्षकों द्वारा मैनुअली (हाथ से) जांचा गया और फिर उनके अंक सिस्टम में दर्ज किए गए।
रीचेकिंग फीस में भारी कटौती, नंबर बढ़ने पर पैसे होंगे वापस
छात्रों के तनाव को कम करने के लिए मंत्रालय ने रीचेकिंग की फीस को नाममात्र कर दिया है। अब छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका देखने के लिए 700 रुपये के बजाय मात्र 100 रुपये शुल्क देंगे। वहीं, उत्तर पुस्तिका के सत्यापन के लिए 500 रुपये की जगह सिर्फ 100 रुपये देने होंगे।
यदि छात्र किसी विशेष प्रश्न का पुनर्मूल्यांकन कराना चाहते हैं, तो प्रति प्रश्न शुल्क केवल 25 रुपये तय किया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने यह भी बड़ा ऐलान किया है कि यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद छात्र के अंक बढ़ते हैं, तो उनके द्वारा जमा की गई पूरी फीस वापस (रिफंड) कर दी जाएगी।
19 मई से खुलेगी विंडो, ऐसे दर्ज कराएं आपत्ति
परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने छात्रों को सांत्वना देते हुए पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा (टाइमलाइन) साझा की है।
19 से 22 मई (समीक्षा अवधि): असंतुष्ट छात्र अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की कापी प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वे अपनी कापियों को खुद देखकर कमियों को चिह्नित कर सकते हैं।
26 से 29 मई (त्रुटि सुधार विंडो): यदि कापियों में कोई गड़बड़ी या अंक जोड़ने में गलती मिलती है, तो छात्र इस दूसरी विंडो के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, जिसे विशेषज्ञों का पैनल सुधारेगा।