पेट्रोल में एथेनाल ब्लेंडिंग के बाद सरकार अब डीजल में भी ब्लेंडिंग अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार को कहा कि कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने (ब्लेंडिंग) का नियम भारत इस साल के अंत तक अनिवार्य कर सकता है।
सीआईआई मल्टीमाडल ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स समिट’ में उमाशंकर ने यह भी कहा कि राजमार्ग मंत्रालय जल्द ही ट्रक-ट्रेलरों की अदला-बदली पर मसौदा अधिसूचना ला सकता है।
ट्रक-ट्रेलरों की अदला-बदली परिवहन की प्रक्रिया है, जिसमें एक ट्रक चालक किसी निर्धारित स्थान (जैसे डिपो या कंपनी टर्मिनल) पर अपना भरा हुआ ट्रेलर छोड़कर, तुरंत डिलीवरी के लिए तैयार दूसरा ट्रेलर जोड़ लेता है।
उमाशंकर ने कहा, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल की मिलावट पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। भारत पेट्रोलियम ने डीजल में आइसोब्यूटेनाल की मिलावट के लिए शोध किया है। परिणाम उत्साहजनक हैं।
इस बात की काफी संभावना है कि ब्लैंडिंग संबंधी अनिवार्यता इस साल के अंत तक लागू हो जाए। चूंकि डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में लगभग दोगुनी है, इसलिए डीजल की ब्लैंडिंग का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पेट्रोल-एथेनाल ब्लेंडिंग की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव पड़ेगा।
परिवहन सचिव ने कहा, मंत्रालय ने ई85 (पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत एथेनाल का मिश्रण) और ई100 (जो वाहनों को लगभग शुद्ध इथेनाल पर चलने की अनुमति देने संबंधी) वाहन निर्माण के लिए मसौदा अधिसूचना जारी की है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन उत्सर्जन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिससे सभी वाहन श्रेणियों में बायोफ्यूल वाहनों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। भारत ने स्वच्छ ईंधन बनाने के लिए पेट्रोल में एथेनाल (गन्ने, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बने) का 20 प्रतिशत ब्लैंडिंग का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है।