नीरज चोपड़ा से उम्मीद थी कि जब वह कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में उतरेंगे तो गोल्ड मेडल ही लेकर आएंगे। बीती रात जब नीरज ग्लास्गो में भाला पकड़े हुए थे तो गोल्ड मेडल की खुशबू आ रही जबकि उस समय नीरज डरे सहमे हुए थे। नीरज गोल्ड नहीं जीत सके और सिल्वर लेकर आए।
नीरज ने खुद बताया है कि वह डरे हुए थे। इसका कारण उनकी फिटनेस है जिससे वह लगातार जूझ रहे हैं। चोट के कारण ही नीरज लंबे समय से मैदान से दूर रहे और लगातार परेशान रहे। एक साल में पहली बार नीरज किसी बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे और पदक जीतकर लौटे, लेकिन नीरज जिस दबदबे के लिए जाने जाते हैं वो दिखा नहीं।
मेहनत का फल मिल रहा है।
ग्लास्गो में तापमान 14 डिग्री था। यानी सर्द मौसम। ऐसे मौसम में खिलाड़ियों को परेशानी होती है, लेकिन नीरज के लिए परेशानी मौसम से ज्यादा उनकी फिटनेस है। पिछले सितंबर से नीरज पीठ की समस्या से परेशान हैं। इसी कारण वह उस आत्मविश्वास में नजर नहीं आ रहे थे जो उनके चेहरे की पहचान था। जून में दोहा डायमंड लीग में महीने दूर रहने का असर उनके प्रदर्शन पर दिखा था।
सिल्वर जीतने के बाद नीरज ने कहा, “मेरी वापसी अच्छी चल रही है। मैं सर्द मौसम में अच्छा नहीं करता क्योंकि अंत में मैं एक भारतीय हूं। पोडियम पर वापसी करना अच्छा है। मैंने जो मेहनत की है उसका परिणाम मिल रहा है।”
‘मैं डरा हुआ था’
नीरज ने माना कि उनकी चोट ने उनके अंदर डर पैदा किया। नीरज ने कहा, “निश्चित तौर पर बदलाव होगा। अगले कुछ टूर्नामेंट्स में मैं कुछ अच्छी थ्रो करने की कोशिश करूंगा। मुझे लगता है कि मुख्य अंतर ये है कि आप 100 फीसदी फिट हैं या नहीं। आपके अंदर वो लड़ने की क्षमता होनी चाहिए कि आप किसी भी चीज से वापसी कर सकते हो।”
उन्होंने कहा,”लेकिन चोट आपको सोचने पर मजबूर करती है। आप डरे हुए होते हैं। मैं भी आज डरा हुआ था। मैं ज्यादा तेज भागना नहीं चाहता था। मैं अपने शरीर को कंट्रोल में रखना चाहता था, लेकिन हां मेरी थ्रो ठीक थी।”