जब अभिजीत दीपके ने कुछ समय पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) बनाई थी, तो किसने सोचा होगा कि यह शिक्षा के मुद्दे पर भारत की युवा पीढ़ी को एकजुट करेगी और केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ेगा, लेकिन सीजेपी को मिली सफलता के बाद अब आनलाइन कई ऐसी ही मुद्दे-आधारित मुहिम शुरू हो गई हैं।
इन्ही में से एक ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (आरएचए) जाति-आधारित आरक्षण के खिलाफ इंटरनेट मीडिया पर जोर पकड़ रहा है। ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ के इंस्टाग्राम पर 56 लाख से अधिक फाओलर हो गए हैं।
यह समूह खुद को गैर-राजनीतिक बताता है और जाति-आधारित आरक्षण को खत्म करने की मांग कर रहा है। पिछले सप्ताह जब पूरे देश में सीजेपी के नेतृत्व में छात्र विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे, तब ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ आनलाइन लोकप्रियता हासिल कर रहा था।
फिलहाल, इंस्टाग्राम पर इसके 56 लाख से अधिक फॉलोअर हैं। एक्स पर इसके 17 हजार से ज़्यादा फॉलोअर हैं। इस अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य “एक राष्ट्र, एक पहचान – भारतीय” को बढ़ावा देना है।
‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ ने जाति-आधारित भेदभाव खत्म करने और सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है। इस अकाउंट पर 120 से ज़्यादा पोस्ट हैं और यह सिर्फ भारतीय सेना के अकाउंट को फॉलो करता है।
दिलचस्प बात यह है कि जाति-आधारित आरक्षण को खत्म करने की मांग करने के बावजूद, आरएचए बीआर. आंबेडकर के मशहूर नारे “शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित हो जाओ” का इस्तेमाल करता है। इसके लोगो पर लिखा इसका आदर्श वाक्य है – “समानता, योग्यता, न्याय”। यह खुद को नागरिकों के नेतृत्व वाला आंदोलन बताता है।
आरएचए ने कहा कि केवल दिव्यांगों, अनाथों, शहीदों के बच्चों और आर्थिक आधार पर गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए। गौरतलब है कि फिलहाल, आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय है, हालांकि कई पार्टियों ने इसे बढ़ाने की मांग की है।
इस आंदोलन ने जोर दिया कि सरकार को जाति आधारित पहचान को मान्यता देना बंद कर देना चाहिए। नागरिकों को सरकारी फार्म या किसी भी शैक्षणिक या नौकरी के आवेदन में अपनी जाति बताने की ज़रूरत न हो।