पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में फूट पड़ गई है। बंगाल में विधायकों के बाद दिल्ली में सांसदों ने भी टीएमसी चीफ से बगावत की। टीएमसी के बागी गुट का दावा है कि 19 सांसदों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का समर्थन किया है और उनके हस्ताक्षर भी हासिल कर लिए हैं।
इस तरह से सत्ताधारी गठबंधन अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विपक्षी खेमे की अन्य पार्टियों का समर्थन जुटाकर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने की कोशिश में है। पिछले संसदीय सत्र में संविधान संसोधन को मंजूरी देने के लिए जरूरी विशेष बहुमत न होने की वजह से सरकार के विधायी एजेंडे को झटका लगा था।
शिवसेना में पड़ सकती है फूट
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में एनडीए के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अब जिन पार्टियों में टूट-फूट हो सकती है उनमें से एक उद्धव ठाकरे की शिवसेना है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में गठबंधन की जबरदस्त जीत के समय से ही इसकी चर्चा हो रही थी, लेकिन अब इसे और बल मिला है।
6 सांसदों का करना होगा विलय
उद्धव ठाकरे की पार्टी के लोकसभा में नौ सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत अपनी सदस्यता बचाने के लिए इनमें से छह सांसदों को किसी दूसरी पार्टी में विलय करना होगा और इसके लिए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना सबसे संभावित विकल्प मानी जा रही है।
अपने जमीनी नेटवर्क और लोगों तक पहुंच की वजह से शिंदे राज्य के ज्यादातर हिस्सों में विरोधी गुट को हटाने और उसके ज्यादातर बड़े नेताओं को अपने पाले में करने में सफल रहे हैं, जबकि उद्धव का प्रभाव काफी हद तक मुंबई तक ही सीमित रह गया है।
सूत्रों ने बताया कि संसद में अपने गठबंधन की संख्या बढ़ाने की बीजेपी की कोशिशों से जुड़ी ज्यादातर राजनीतिक हलचल मौजूदा लोकसभा (जिसमें 540 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं) में 360 यानी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की उसकी कुल योजना के सफल होने पर भी निर्भर करेगी।