बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस नियंत्रित कई नगर निकायों में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों से राजनीतिक और प्रशासनिक संकट लगातार गहराता जा रहा है।
हुगली के भद्रेश्वर और उत्तर 24 परगना के टीटागढ़ नगर निकायों में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों से बोर्ड के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
उत्तर 24 परगना के बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र में तृणमूल के नगर निकाय लगातार संकट में हैं। भाटपाड़ा, बैरकपुर, हालीशहर और नोआपाड़ा के बाद अब टीटागढ़ पालिका में भी छह तृणमूल पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है।
इस्तीफा देने वाले पार्षदों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में लोगों को जरूरी सेवाएं देना और इलाके की समस्याओं का समाधान करना संभव नहीं हो पा रहा है।
उनका आरोप है कि चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी या जिला नेतृत्व ने भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया। हालांकि बैरकपुर के भाजपा विधायक कौस्तव बागची ने दावा किया कि नागरिक सेवाओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
वहीं दूसरी ओर हुगली के भद्रेश्वर पालिका के उपाध्यक्ष फिरोज खान को पालिका के महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही पालिका चेयरमैन प्रलय चक्रवर्ती समेत आठ पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पालिका संचालन की जिम्मेदारी फिरोज खान के कंधों पर आई थी।
सूत्रों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से अब पूरे बोर्ड के टूटने की आशंका बढ़ गई है। फिरोज खान पर पहले भी इलाके में अशांति फैलाने और पालिका में हंगामा करने के आरोप लगे थे।
पालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले में फिर तलब हुए रथीन घोष
इधर पालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले में ईडी ने पूर्व खाद्य मंत्री और तृणमूल विधायक रथीन घोष को एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया है।
ईडी सूत्रों का दावा है कि दक्षिण दमदम पालिका में अवैध नियुक्तियों के लिए करीब 150 लोगों के नाम की सिफारिश की गई थी। मामले में पहले गिरफ्तार किए गए पूर्व मंत्री सुजीत बसु से पूछताछ के बाद रथीन घोष की भूमिका को लेकर भी ईडी ने जांच तेज कर दी है।