दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर जब देश का कोई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पहुंचता है, तो वह सिर्फ एक दौरा नहीं होता- वह होता है उन अनकहे जज़्बों को सलाम जो माइनस 50 डिग्री सेल्सियस में भी तिरंगे की शान बरकरार रखते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण दौरा हाल ही में भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने किया।
एडजुटेंट जनरल सेना के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। इनकी जिम्मेदारी सिर्फ रणनीति बनाना नहीं, बल्कि हर सैनिक और उसके परिवार के कल्याण, अनुशासन, मानव संसाधन प्रबंधन और सेवा नीतियों को देखना है। जब ऐसे अधिकारी खुद 18,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर जाकर जवानों से मिलते हैं, तो संदेश साफ होता है- ‘आप अकेले नहीं हैं, पूरा देश और पूरी सेना आपके साथ खड़ी है।’
अग्रिम मोर्चों पर लिया तैयारियों का जायजा
लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पश्चिमी हिस्से में पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर तैनात जवानों से सीधी बातचीत की। सियाचिन सिर्फ एक ग्लेशियर नहीं, बल्कि हिम्मत की असली परीक्षा है। यहां ऑक्सीजन कम, बर्फीले तूफान आम, और दुश्मन हर वक्त सामने। ऐसे में एडजुटेंट जनरल ने अग्रिम चौकियों तक जाकर ऑपरेशनल तैयारियों को परखा। उन्होंने देखा कि हमारे जवान किन परिस्थितियों में दिन-रात देश की हिफाजत कर रहे हैं।
बातचीत के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक ने जवानों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सियाचिन में तैनाती सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की मिसाल है। जब तापमान हड्डियों को जमा देने वाला हो और हर कदम पर जान का जोखिम हो, तब भी जो मुस्कुराकर सीमा पर डटा रहे- वही सच्चा हीरो है।
सैनिक कल्याण बना प्राथमिकता
इस दौरे का एक बड़ा मकसद सैनिकों को मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानना भी था। एडजुटेंट जनरल ने सियाचिन ब्रिगेड के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा कि अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात जवानों की मुश्किलें कम करने के लिए क्या नए कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि स्वास्थ्य, राशन, रहने की व्यवस्था और मनोबल बनाए रखने के लिए लगातार नई पहल की जा रही हैं। ठंड से बचाव के आधुनिक उपकरणों से लेकर बेहतर मेडिकल सपोर्ट तक, हर स्तर पर काम हो रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक ने सियाचिन ब्रिगेड की इस बात के लिए खास सराहना की कि वह चुनौतीपूर्ण हालात में भी युद्धक दक्षता बढ़ाने के लिए नवाचार का सहारा ले रही है। आधुनिक तकनीक, बेहतर सर्विलांस और नए उपायों के जरिए सेना अपनी तैयारियों को और धार दे रही है। यह दिखाता है कि भारतीय सेना परंपरा के साथ-साथ बदलाव को भी अपनाने में आगे है।
देश को भरोसा- सियाचिन के वीर अडिग
दौरे के अंत में एडजुटेंट जनरल ने विश्वास जताया कि सियाचिन के वीर सैनिक इसी समर्पण और साहस के साथ भविष्य में भी मातृभूमि की रक्षा करते रहेंगे। वे भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को और आगे ले जाएंगे।
आपको बता दें कि सियाचिन ग्लेशियर पर पाकिस्तान की सेना के सामने हमारे जवान साल के 365 दिन डटे रहते हैं। वहां पोस्टिंग एक सजा नहीं, सम्मान है।
यही वजह है कि सेना के शीर्ष अधिकारी समय-समय पर वहां जाकर जवानों का मनोबल बढ़ाते हैं। क्योंकि जब दिल्ली में बैठा एक अफसर बर्फ के बीच जवान से हाथ मिलाता है, तो सियाचिन की ठंड भी थोड़ी कम लगने लगती है।