आवासीय संपत्ति में दुकान-दफ्तर चलाने पर होगी कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों को दिए सीलिंग के निर्देश…

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर के नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन रिहायशी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दें, जिनका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्य से किया जा रहा है। अगर कोई उल्लंघन पाया जाता है तो उन्हें सील कर दें। 

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन क्षेत्रों का किसी विशेष उपयोग (रिहायशी या व्यावसायिक) के लिए स्पष्ट रूप से निर्धारण नहीं किया गया है, उन पर भी गौर किया जाएगा, लेकिन फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

पीठ ने कहा, ‘हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि सभी अधिकारी यह काम बिना किसी भेदभाव के करेंगे। अगर वे ‘पिक एंड चूज’ (अपनी पसंद से चुनने) का तरीका अपनाते हैं तो अदालत इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी।’ शीष न्यायालय ने इससे पहले बिल्डिंग बाय-लाज और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों का बड़े पैमाने पर खुलेआम उल्लंघन किए जाने के मामले का संज्ञान लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मानदंडों और नियमों का खुलेआम उल्लंघन करके अक्सर निर्माण कार्य किए जाते हैं, जिनमें निषिद्ध क्षेत्र भी शामिल हैं। न्यायालय ने कहा था, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि काम पूरा होने के बाद ऐसी जमीनों और इमारतों का इस्तेमाल अक्सर उस काम के अलावा दूसरे काम में होता है, जिसके लिए सक्षम अधिकारी से मूल रूप से मंजूरी मिली होती है।’ 

सर्वोच्च न्यायालय ने चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह आदेश दिया और देशभर में इस तरह के मामले पर गौर करने का फैसला लिया।

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