राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम (एबीवीकेए) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अरावली समिति को पत्र लिखकर उसकी जन-परामर्श अधिसूचना पर चिंता जताई है। इस पत्र में एबीवीकेए ने कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें सुझाव या राय देने के लिए पर्याप्त समय न देना शामिल है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पर्यावरण संगठन पीपल फार अरावली ने परामर्श प्रक्रिया में इसी तरह की कमियों को उजागर किया था। इस उच्च-स्तरीय समिति को केंद्र की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा का कार्य सौंपा गया है, जिसमें अरावली पर्वत शृंखला की परिभाषा शामिल है।
समिति को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। 21 जुलाई को जारी अधिसूचना में अरावली क्षेत्र में फैले राज्यों सहित विभिन्न हितधारकों से प्रतिनिधित्व, सुझाव और इनपुट मांगे गए थे। अधिसूचना के 21 दिनों के भीतर ईमेल या आधिकारिक गूगल फार्म के माध्यम से सुझाव दिए जाएं।
दो अगस्त को समिति को भेजे गए पत्र में एबीवीकेए ने कहा, 21 दिनों की अवधि प्रभावित समुदायों के मुद्दों को समझने, अपने ग्राम सभाओं और प्रतिनिधियों से परामर्श करने, संबंधित रिकार्ड जुटाने और दस्तावेज द्वारा समर्थित सुझाव प्रस्तुत करने के लिए अपर्याप्त है।