सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र, राज्यों और निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में किया जाए, न कि नागरिकता, निवास स्थान, पता या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में। यह याचिका अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में यह घोषणा करने की भी मांग की गई है कि नए मतदाता पंजीकरण के लिए फार्म 6 में जन्मतिथि और निवास स्थान के प्रमाण के रूप में आधार का उपयोग आधार अधिनियम की धारा 9, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत है और इसलिए अमान्य और अप्रभावी है।