पूरे देश में जहां रामनवमी का जुलूस आमतौर पर एक या दो दिनों तक सीमित रहता है, वहीं पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर (पुराना डालटनगंज) में यह परंपरा पूरे पांच दिनों तक चलती है।
इस अनोखी परंपरा की शुरुआत साल 1933 में तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत द्वारा दी गई अनुमति से हुई थी। तब तय किए गए रूट और नियम आज भी उसी अनुशासन के साथ लागू हैं।
यही वजह है कि मेदिनीनगर की रामनवमी देशभर में अपनी अलग और विशिष्ट पहचान रखती है। देश की आजादी से पहले शुरू हुई इस परंपरा को संगठित स्वरूप देने के लिए वर्ष 1934 में रामभक्त राम गोविंद राम, राजा राम गुप्ता और घिना प्रसाद सिंह ने श्री महावीर नवयुवक दल (जेनरल) की स्थापना की।
इसके बाद से यह संस्था रामनवमी के आयोजन की धुरी बनी हुई है और समय-समय पर विभिन्न पदाधिकारियों ने इसे आगे बढ़ाया है। वर्तमान में भी यह परंपरा उसी उत्साह और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है।
पांच दिनों तक ऐसे निकलता है महावीरी जुलूस
मेदिनीनगर में रामनवमी के दौरान चार दिनों तक विभिन्न पूजा समितियों और अखाड़ों द्वारा महावीरी ध्वज के साथ जुलूस निकाला जाता है। पांचवें दिन आकर्षक झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकलती है, जिसमें एक से बढ़कर एक दृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं। यह अनूठा आयोजन देखने के लिए आसपास के जिलों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
दिया-लालटेन से आधुनिक लाइटिंग तक
शुरुआती दौर में जब बिजली की सुविधा नहीं थी, तब जुलूस दिया, लालटेन और मशाल की रोशनी में निकलता था। पचास के दशक में बिजली आने के बाद पोल लाइट का सहारा लिया गया। धीरे-धीरे जनरेटर, साउंड सिस्टम और ट्रैक्टर पर लगे चोंगा के माध्यम से भक्ति गीतों की गूंज बढ़ी। आज यह परंपरा आधुनिक रूप ले चुकी है, जहां आकर्षक लाइटिंग और डीजे जुलूस की भव्यता बढ़ा रहे हैं।
1990 से शुरू हुई पुरस्कार परंपरा
श्री महावीर नवयुवक दल (जेनरल) द्वारा वर्ष 1990 से बेहतर झांकी और अनुशासन के लिए पूजा समितियों और अखाड़ों को पुरस्कृत किया जाता है। इस पहल से आयोजन में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों बढ़ी हैं। पहले यह कार्यक्रम पचमुहान में होता था, जिसे बाद में छहमुहान स्थानांतरित किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में यह आयोजन आज भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
सौहार्द की अनोखी मिसाल
मेदिनीनगर की रामनवमी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी है। यहां नवमी के जुलूस का स्वागत मुहर्रम इंतजामिया कमेटी करती है, जबकि मुहर्रम के जुलूस का स्वागत श्री महावीर नवयुवक दल करता है। दोनों समुदाय एक-दूसरे को पगड़ी बांधकर सम्मानित करते हैं, जो आपसी भाईचारे का संदेश देता है।
इतिहास में दर्ज दर्दनाक हादसा
इस गौरवशाली परंपरा के बीच वर्ष 2000 की एक दर्दनाक घटना भी जुड़ी है, जब रामनवमी जुलूस के दौरान 11 केवी का बिजली तार गिरने से 29 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। बाद में सरकार द्वारा मृतकों के आश्रितों को नौकरी देकर सहायता प्रदान की गई।