भारत में विवाह को सात जन्मों का साथ माना जाता है। यहां सामाजिक ताना-बाना इतना मजबूत है कि संबंध-विच्छेद की दर दुनिया में सबसे कम है। किसी को भी हैरत हो सकती है कि तलाक का हिंदी में कोई शब्द ही नहीं है।
पहली बार विवाह-विच्छेद का प्रविधान हिंदू कोड बिल में किया गया। इन सबके बावजूद बढ़ते आधुनिकतावाद से दांपत्य जीवन में अलगाव के मामले चिंता का सबब बन रहे हैं।
साल-दर-साल विवाह-विच्छेद की दर बढ़ रही है। इसी सामाजिक विसंगति पर अंकुश लगाने काे गोवा के एक कालेज ने युवाओं को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाने की अनूठी पहल की है।
पणजी स्थित गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने “मैरिज रेडिनेस: प्रिपेयरिंग फार हेल्दी एंड लास्टिंग रिलेशनशिप्स” नामक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है।
कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पाई के अनुसार, यह 15 दिनी कोर्स दो से 17 दिसंबर, 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा। यह कोर्स केवल शादी की रस्मों और समारोह की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो दिलों के बीच आपसी समझ, अटूट प्रतिबद्धता और वैवाहिक जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियों को गहराई से समझने पर केंद्रित है।
बढ़ते तलाक के आंकड़े और सरकारी सोच
यह अहम कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब समाज में रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। तलाक के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल रही है।
गोवा के विधि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025 के बीच राज्य की अदालतों में तीन हजार से अधिक विवाह व तलाक से जुड़े मामले दर्ज किए गए, जिनमें अकेले साल 2024 में 947 मामले शामिल थे।
हाल ही में पणजी में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी राज्य में बढ़ते तलाक के मामलों पर अंकुश लगाने की “प्री-मैरिज काउंसलिंग” शुरू करने की मंशा जताई थी।
कोर्स में क्या सिखाया जाएगा?
कॉलेज के ब्रोशर के अनुसार, इस कोर्स के सत्रों में युवाओं को कई महत्वपूर्ण और जीवन को दिशा देने वाले विषयों पर मार्गदर्शन मिलेगा।
इन सत्रों में “डेटिंग के उद्देश्य और गतिशीलता”, “आत्म-जागृति और अपनेपन की जरूरत”, “रिश्तों पर पुरुषत्व और स्त्रीत्व का प्रभाव”, तथा “शादी (समारोह) और वैवाहिक जीवन के बीच का मूल अंतर” जैसे विषयों पर गहराई से चर्चा होगी।
यह कोर्स स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के साथ-साथ उन सभी अविवाहित युवाओं के लिए खुला है जो भविष्य में एक स्वस्थ, मजबूत और खुशहाल रिश्ते की नींव रखना चाहते हैं।
यह पहल समाज को यह सोचने पर विवश करती है कि जिस तरह एक अच्छे करियर के लिए शिक्षा जरूरी है, ठीक उसी तरह एक खुशहाल, अटूट और संवेदनशीलता से भरे पारिवारिक जीवन के लिए मानसिक और भावनात्मक तैयारी भी उतनी ही आवश्यक है।