बांग्लादेश में जुलाई 2024 के हिंसक प्रदर्शनों के बाद दर्ज हुए मामलों की जांच की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बांग्लादेश पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में दर्ज 1855 मामलों में से 90 प्रतिशत से अधिक की जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है, जबकि घटनाओं को लगभग दो साल बीत चुके हैं। इनमें 799 केस हत्या से जुड़े हैं, जबकि 1056 मामलों में हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं।
इस देरी ने पीड़ित परिवारों के साथ-साथ उन लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है, जो खुद को झूठे मामलों में फंसाया गया बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की वकील इशरत हसन के मुताबिक, यदि जांच वर्षों तक लटकी रहती है तो इससे न केवल पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि निर्दोष लोगों का जीवन भी प्रभावित होता है और जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठने लगता है।
सुप्रीम कोर्ट बार चुनाव में विवाद
इसी बीच बांग्लादेश में न्यायिक व्यवस्था को लेकर एक और विवाद सामने आया है। बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने आगामी चुनाव में अवामी लीग समर्थक वकीलों को हिस्सा लेने से रोकने का फैसला किया है। यह निर्णय 13-14 मई 2026 को होने वाले चुनाव से पहले एक बैठक में लिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कदम अवामी लीग पर लगे कानूनी प्रतिबंधों के आधार पर उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए आलोचना की है। दूसरी ओर, अवामी लीग ने पहले ही अपने ऊपर लगे प्रतिबंध को लोकतंत्र पर हमला बताया है।