सरकार इस खरीफ सीजन में 64 लाख टन यूरिया और 19 लाख टन दूसरे फर्टिलाइजर के आयात करने की योजना बना रही है।
फर्टिलाइजर विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि यूरिया और डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) की खुदरा कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं होगा और खरीफ सीजन के लिए आपूर्ति पर्याप्त है।
देश में नहीं होगी यूरिया की कमी
अभी यूरिया 266.50 रुपये प्रति 45 किलो बैग और डीएपी 1,350 रुपये प्रति 50 किलो बैग बिक रहा है। पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से 9.4 लाख टन यूरिया पहले ही मिल चुका है।
फरवरी में वैश्विक टेंडर के जरिये 13.07 लाख टन और हासिल किया गया, जबकि 25 लाख टन यूरिया के लिए और टेंडर निकाला गया है और इसके मई में आने की उम्मीद है।
अधिकारी ने कहा, ज्यादातर आयात होर्मुज स्ट्रेट से होता है। हमें पूरा यकीन है कि हमें आपूर्ति समय पर मिल जाएगी।
घरेलू उत्पादन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गैस की किल्लत के चलते मार्च में उत्पादन पर असर पड़ा था और प्लांट का इस्तेमाल घटकर 60-65 प्रतिशत रह गया था। उन्होंने कहा, अब हमने ज्यादा कीमत पर भी गैस आयात करने के उपाय किए हैं।
यूरिया संयंत्र के लिए गैस की उपलब्धता जो पहले 60-65 प्रतिशत थी, वह अब 97 प्रतिशत है। संकट के बाद घरेलू यूरिया उत्पादन 35.4 लाख टन तक पहुंच गया है।
सरकार ने 19 लाख टन गैर यूरिया फर्टिलाइजर के आयात के लिए एक वैश्विक टेंडर भी जारी किया है और इसमें 12 लाख टन डीएपी, 4 लाख टन ट्रिपल सुपरफास्फेट (टीएसपी), और तीन लाख टन अमोनियम सल्फेट शामिल हैं।
घरेलू उत्पादन और मांग का आकलन करने के बाद यूरिया और गैर यूरिया फर्टिलाइजर का और आयात किया जा सकता है।