बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया के तहत ऐसे 24 लाख लोगों को चिन्हित किया गया है, जिनकी छह व उससे अधिक संतान बताई गई हैं। पिता व संतान की उम्र में बेहद कम व काफी ज्यादा का अंतर पाया गया है।
संदेह के आधार पर इन लोगों को सुनवाई के लिए नोटिस भेजा जाएगा। सबसे अधिक मामले बंगाल के उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा व मुर्शिदाबाद जैसे बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में पाए गए हैं। यहां करीब 50 विधानसभा क्षेत्र हैं।
बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार ऐसे लोगों ने गणना प्रपत्र के माध्यम से अपने बारे में जो तथ्य दिए हैं, वे संदेह पैदा करते हैं।
4.74 लाख मामले ऐसे हैं, जहां पिता व संतान की उम्र में 15 वर्ष व उससे भी कम का अंतर है, वहीं 8.41 लाख मामलों में पिता व संतान की उम्र में 50 वर्ष से भी अधिक का अंतर पाया गया है।
कई मामलों में जैविक पिता-संतान होने को लेकर भी संदेह की स्थिति उत्पन्न हो रही है। मालूम हो कि बंगाल में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां अन्य को पिता के तौर पर दिखाया गया है। सीईओ कार्यालय के अनुसार इन लोगों को अगले सात दिनों में सुनवाई का नोटिस भेजा जा सकता है।
‘तार्किक विसंगतियों’ के मामले 1.36 करोड़ से घटकर 91.46 लाख
बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया के तहत ‘तार्किक विसंगतियों’ के मामले 1.36 करोड़ से घटकर 91.46 लाख हो गए हैं। जिन मामलों को इस श्रेणी में रखा गया है, उनमें ऐसे लोग शामिल हैं, जिनके रिकार्ड में ‘प्रोजेनी मैपिंग’ के दौरान असामान्य पारिवारिक आंकड़ा पाया गया है।
ये मामले मतदाता सूची से बाहर किए गए 58.20 लाख लोगों व 30 लाख अनमैप्ड मतदाता के मामलों के अतिरिक्त हैं यानी इनमें ऐसे लोग शामिल हैं, जो सेल्फ-मैपिंग या प्रोजेनी-मैपिंग के माध्यम से 2002 की मतदाता सूची से कोई लिंक स्थापित नहीं कर पाए हैं।