यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग में वर्षों से हो रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दुर्ग क्षेत्र में 209 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक अतिक्रमणों की पहचान की है।
इनमें बड़ी संख्या में कच्चे निर्माणों के अलावा होटल, रेस्टोरेंट और अन्य पक्के व्यावसायिक निर्माण भी शामिल हैं।
जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने कहा कि दुर्ग क्षेत्र में चल रहे सभी अवैध निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोकने, संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज कराने तथा नियमानुसार अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही पुरातत्व विभाग को पूर्व में जारी नोटिसों पर सख्ती से कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के बाद बने सात से आठ व्यावसायिक अतिक्रमणों का राजस्व विभाग द्वारा भी सत्यापन किया गया है। वर्ष 2024 में एएसआई ने ऐसे मामलों में 67 नोटिस जारी किए थे।
एएसआई के संरक्षण सहायक प्रेमचंद शर्मा ने बताया कि दुर्ग क्षेत्र प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित है।
यहां केंद्र सरकार की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण या मरम्मत प्रतिबंधित है। इसके बावजूद 200 से अधिक कच्चे अतिक्रमणों के साथ कई होटल, रेस्टोरेंट और हैंडीक्राफ्ट भवन अवैध रूप से निर्मित पाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। डेमोलिशन से संबंधित फाइल जोधपुर क्षेत्रीय कार्यालय और दिल्ली स्थित मुख्यालय भेजी गई है।
स्वीकृति मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। नियमों के तहत अवैध निर्माण हटाने की लागत संबंधित व्यक्ति से वसूली जा सकती है, साथ ही एक लाख रुपए से अधिक जुर्माना और दो वर्ष तक की सजा का भी प्रावधान है।