दिल्ली पुलिस ने जानकीपुरम की सीता विहार कालोनी में ड्रग निर्माण इकाई पकड़ कर लखनऊ पुलिस की निगरानी और सूचना तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष-2017 से 2018 तक यह मकान बंद रहता था।
2019 में प्रभात नामक व्यक्ति ने इसे खरीदा। कुछ माह बाद ही उसने प्रयागराज के इमरान को बेच दिया। इमरान यहां रहने नहीं आया। मकान के बाहर बिकाऊ है.. लिख दिया गया। करीब छह माह पहले एक युवक यहां आकर रहने लगा।
उसने अपना नाम राजू बताया और कहा कि मकान किराए पर लिया है। उसने मकान बिकाऊ है के नीचे लिखे मोबाइल नंबर के कई अंक भी मिटा दिए। उसके साथ कभी-कभी एक युवती आती थी, जबकि छह-सात युवक अक्सर मकान पर आते-जाते थे।
घर के बाहर खड़ी रहती थी बिना नंबर की स्कॉर्पियो
लोगों का कहना है कि युवकों के आने के दौरान रात करीब 12 बजे से सुबह पांच बजे तक मकान में लाइटें जलती रहती थीं और अंदर काफी चहल-पहल रहती थी। इससे आशंका है कि इसी दौरान ड्रग बनाया जाता था। ॉकरीब तीन माह से मकान के बाहर बिना नंबर की काली स्कॉर्पियो खड़ी रहती थी।
डैशबोर्ड पर पुलिस की टोपी रखी रहती थी। आने वाले युवक फार्च्यूनर, एक्सयूवी और विटारा जैसी गाड़ियों से आते थे। कार्रवाई से तीन दिन पहले मकान के बाहर दो सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे।
दिल्ली पुलिस के जाने के बाद पहुंची स्थानीय पुलिस
लोगों ने बताया कि रविवार रात करीब तीन बजे दिल्ली पुलिस मकान पर पहुंची और करीब एक घंटे तक कार्रवाई की। आसपास के मकानों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने किराएदारों के पुलिस सत्यापन, गश्त और वाहनों की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। मकान में रहने वालों का पुलिस सत्यापन था या नहीं इस पर स्थानीय पुलिस बोल नहीं रही है।