मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण जो संकट पनपा है इसका असह भारत पर काफी पड़ा है। वैश्विक कच्चे तेल बाजार में मार्च से जारी उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है।
अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, जबकि रूसी कच्चे तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का बिल जल्द वोट के लिए आ सकता है।
इन परिस्थितियों में भारत, जो दुनिया का बड़ा तेल आयातक है, महत्वपूर्ण सवालों से जूझ रहा है। क्या वेनेजुएला भारत की तेल आपूर्ति में कमी को पूरा कर पाएगा?
ईरान और रूस पर अमेरिकी दबाव
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को इकोनॉमिक डी-डे योजना का ऐलान किया।
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों और कंपनियों को अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
लगभग 60 ईरान से जुड़े व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि, सबसे सख्त द्वितीयक प्रतिबंध (खासकर चीनी वित्तीय संस्थानों पर) अभी रोके गए हैं।
भारत सीधे ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदता, लेकिन अगर चीन (ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार) अमेरिकी दबाव में खरीद बंद कर देता है, तो वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ेगा।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतें बढ़ने से आयात बिल और पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
दूसरी तरफ, लिंडसे ग्राहम का रूस प्रतिबंध बिल अमेरिकी सीनेट से पास हो चुका है और अब हाउस में जाएगा। यह बिल राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
वेनेजुएला भारत के शीर्ष आपूर्तिकर्ताओं में शामिल
मध्य पूर्व में संकट खासकर होर्मुज में इसके बाद भारत ने आपूर्ति विविधता बढ़ाई है। वेनेजुएला भारत के शीर्ष 5 कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
अप्रैल से वेनेजुएला का कच्चा तेल भारत को लगभग 220-380 हजार बैरल प्रति दिन (भारत के आयात का करीब 8 प्रतिशत) मिल रहा है। यह मुख्य रूप से रिलायंस के जामनगर, पारादीप, मुंद्रा और वडिनार जैसी रिफाइनरियों में जाता है।
रूसी तेल अभी भी सबसे बड़ा हिस्सा है लगभग 20 लाख बैरल प्रति दिन या आयात का 50 प्रतिशत से अधिक। लैटिन अमेरिकी तेल का हिस्सा अप्रैल-जुलाई में 12.7 प्रतिशत हो गया है (पिछले साल 3.5 प्रतिशत से)।
क्या वेनेजुएला रूसी तेल की जगह ले सकता है?
- विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला पूर्ण रूप से रूसी आपूर्ति की जगह नहीं ले सकता।
- वेनेजुएला का कुल निर्यात करीब 10-13 लाख बैरल प्रति दिन है, जिसमें से ज्यादातर अमेरिका जाता है। भारत को 3-4 लाख बैरल प्रति दिन मिल रहा है।
- गुणवत्ता की समस्या: वेनेजुएला का तेल भारी-सॉर, उच्च एसिड नंबर और दूषित पदार्थों वाला है। यह रिलायंस और नायरा जैसी जटिल रिफाइनरियों के लिए ठीक है, लेकिन सभी भारतीय रिफाइनरियों के लिए नहीं।
- उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा क्योंकि अपस्ट्रीम और निर्यात बुनियादी ढांचे में कमी है।
- केप्लर के विश्लेषक नवीन दास के अनुसार, वेनेजुएला अधिकतम 4-6 लाख बैरल प्रति दिन भारत को दे सकता है—यह अतिरिक्त स्रोत है, मुख्य स्तंभ नहीं।
विकल्प क्या हैं?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत मध्य पूर्व (सऊदी अरब, यूएई, इराक), अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, ब्राजील और अन्य स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाए। मध्य पूर्व पहले भारत का मुख्य आपूर्तिकर्ता था और होर्मुज व्यवधान खत्म होने पर वापस आ सकता है।