जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को कहा कि उन्होंने अपनी ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ (डीएपी) शुरू करने से पहले किसी राजनीतिक दल से सलाह नहीं ली।
उन्होंने कहा कि वह अन्य दलों के नेताओं को अपना शत्रु नहीं समझते और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।
आजाद ने कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी के सहयोगियों से कहा है कि वे अपनी विचारधारा और सिद्धांतों पर टिके रहें और दूसरों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करें।
कांग्रेस से लगभग पांच दशक पुराना नाता तोड़ने वाले वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को अपने नए दल ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ की घोषणा की।
आजाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘कई लोग बेबुनियाद आरोप लगाते हैं कि हमारे इस पार्टी या उस पार्टी से संबंध हैं।
हमने अपनी पार्टी बनाने से पहले किसी अन्य पार्टी से सलाह नहीं ली थी। इसमें केवल यहां और कश्मीर के हमारे सहयोगी शामिल थे।
किसी भी क्षेत्रीय या राष्ट्रीय दल को इसकी जानकारी नहीं थी।’ पार्टी की घोषणा के दौरान आजाद ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल करने को चुनावी मुद्दा नहीं बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि सड़क, जलापूर्ति और महंगाई चुनावी मुद्दे हैं।
आजाद ने पार्टी के झंडे का भी अनावरण किया, जिसमें गहरे पीले, सफेद और गहरे नीले रंग की तीन पट्टियां हैं।
उन्होंने कहा कि नये दल की प्राथमिकता निर्वाचन आयोग के पास पंजीकरण की होगी। हालांकि, पार्टी अपनी गतिविधियां जारी रखेगी क्योंकि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है।
आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में 50 फीसदी टिकट युवाओं और महिलाओं को देगी। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।