मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी से सियासी हलचल तेज, औपचारिक समापन का अब भी इंतजार…

 संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के दस दिन बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक रूप से समापन यानी सत्रावसान अभी तक नहीं हुआ है।

इसके चलते राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार बिना किसी नए सत्र को बुलाए किसी महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराना चाहती है।

लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। आमतौर पर, सत्र स्थगित होने के तीन-चार दिन के भीतर ही सत्रावसान (औपचारिक समापन) कर दिया जाता है। मगर, रविवार सुबह तक मानसून सत्र के सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं की गई थी।

क्या विशेष विधेयक लाने की तैयारी में है सरकार?

विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार भविष्य के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा सदन में ला सकती है। इससे पहले बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों की आपत्तियों और संख्या बल की कमी के कारण यह प्रयास आगे नहीं बढ़ पाया था।

हालांकि, अब क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा सीटों की संख्या में एक समान बढ़ोतरी करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

विपक्ष के तीखे सवाल और राजनीतिक सरगर्मी

कांग्रेस पार्टी ने इस बात पर कड़ा एतराज जताया है कि स्थगन के इतने दिन बाद भी सत्रावसान की घोषणा क्यों नहीं की गई है। औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं होना और सत्रावसान नहीं होना राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मुख्य विपक्षी दल ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार किसी विशेष सत्र के जरिये इस महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को बिना पूरी चर्चा के पारित कराने की फिराक में है।

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रविधानों को लेकर सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कई नेताओं ने भी जनसंख्या-आधारित परिसीमन से अपनी हिस्सेदारी घटने की आशंका पर चिंता व्यक्त की है, जिससे यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है।

लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी मगर, इस बार रविवार सुबह तक मानसून सत्र के सत्रावसान के बाबत कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। लगाई जा रहीं अटकलें, सरकार बिना किसी नए सत्र को बुलाए कोई अहम विधेयक पारित कराना चाहती है।

सामान्यत: सत्र स्थगित होने के तीन-चार दिन के भीतर सत्रावसान (औपचारिक समापन) कर दिया जाता है।

क्या गृह मंत्री अमित शाह अभी भी दो तिहाई बहुमत की तलाश में हैं: जयराम रमेश

मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही असामान्य देरी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस बार की लंबी देरी कई शंकाओं को जन्म दे रही है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या गृह मंत्री अमित शाह “अभी भी दो तिहाई बहुमत की तलाश” में हैं? पार्टी का मानना है कि इस देरी के पीछे कोई सोची-समझी राजनीतिक चाल हो सकती है, जिसका उद्देश्य भविष्य में किसी बड़े विधायी कदम को आगे बढ़ाना है।

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