प्याज ने बिगाड़ा बजट, कीमतों में 76% तक उछाल; आखिर क्या है महंगाई की बड़ी वजह?…

चीनी की तरह प्याज की कीमतों में भी तेज उछाल है।

नासिक मंडी में एक महीने में ही प्याज की कीमत में लगभग 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कुछ राज्यों में तो थोक मूल्य में दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्याज की कीमतें बढ़ने के तीन प्रमुख कारण हैं-मानसून की अनिश्चितता के कारण खरीफ प्याज की बोआई में विलंब, रबी फसल की कमजोर आवक और सरकारी खरीद का लक्ष्य से लगभग आधा रह जाना। जो कमी रह गई, उसे हालात को भांपकर जमाखोरों ने पूरा कर दिया।

सरकार अब राहत देने का रास्ता तलाश रही है। बफर स्टाक का ताला खोलने की तैयारी है। उन शहरों पर फोकस बढ़ाया जा सकता है, जहां खुदरा भाव तेजी से चढ़ने लगा है। सवाल यह भी है कि सीमित स्टाक से कितनी राहत मिल सकती है।

चीनी में सरकार के पास कई विकल्प हैं, मगर प्याज में तत्काल राहत के लिए सिर्फ बफर स्टाक है। ऐसे में करीब डेढ़ महीना मुश्किल भरा हो सकता है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल ऐसी आशंका से इन्कार किया है। दावा किया है कि प्याज का उत्पादन पिछले वर्ष के लगभग बराबर है।

पिछले वर्ष 307.67 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था। इस बार 307.37 लाख टन होने का अनुमान है। इसलिए उत्पादन के स्तर पर संकट नहीं है, लेकिन मंडियों में आवक में कमी का असर भाव पर दिख रहा है।

नासिक मंडी में 19 अगस्त को प्याज का भाव 3750 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 20 अगस्त को 3551 रुपये और 21 अगस्त को फिर 3600 रुपये के पार पहुंच गया। एक महीने पहले नासिक मंडी में प्याज का भाव 2050 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी थोक भाव में लगभग 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

देश के औसत थोक भाव में भी तेजी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक 22 अगस्त को प्याज का राष्ट्रीय औसत थोक भाव 3397 रुपये प्रति क्विंटल और खुदरा भाव 41.64 रुपये प्रति किलो था।

एक महीने पहले खुदरा भाव 34.95 रुपये प्रति किलो था। यानी खुदरा कीमत भी करीब 19 प्रतिशत बढ़ी है।प्याज की दिक्कत चीनी से थोड़ी अलग है। चिंता बफर स्टाक को लेकर है। दो वर्ष पहले पांच लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य था। पिछले वर्ष इसे घटाकर तीन लाख टन किया गया और इस बार दो लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है।

मई से खरीद शुरू कर दी गई, लेकिन जुलाई के आखिर तक 1.20 लाख टन ही खरीदा जा सका। खुले बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों को प्याज देना जरूरी नहीं समझा। स्टाक कम देखकर सरकार ने चार जुलाई को खरीद मूल्य 1875 रुपये से बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। फिर भी खरीद नहीं बढ़ी तो इसे 2645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया।

बफर स्टाक में इतना प्याज नहीं कि उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके

बफर स्टाक में इतना प्याज नहीं है कि जमाखोरों पर दबाव बनाकर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके। नासिक प्याज निर्यातक संघ के उपाध्यक्ष विकास सिंह का कहना है कि भाव थामने के लिए सरकार बफर का प्याज बाजार में उतारती है।

पिछले वर्ष भी सितंबर से बफर का प्याज खुदरा बिक्री और मंडियों में भेजकर बाजार को संतुलित करने का प्रयास किया गया। इस बार स्टाक कम होने के चलते अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होगी।

इस वजह से अगस्त-सितंबर में बढ़ती है प्याज की कीमत

प्याज की कीमत सामान्य तौर पर अगस्त-सितंबर में बढ़ती है। कारण है कि इसी समय रबी प्याज का भंडार धीरे-धीरे कम होता जाता है और खरीफ फसल के बाजार में आने में समय लगता है। यही अंतराल कीमतों पर दबाव बढ़ाता है। इस साल खराब मौसम और खरीफ बोआई में देरी ने भी बाजार की आशंका बढ़ाई है।

एक महीने में कीमतों में बढ़ोतरी

राज्य23 अगस्त (थोक मूल्य)23 जुलाई (थोक मूल्य)
उप्र45-5030-40
झारखंड40-5526-30
दिल्ली45-5025-30
पंजाब4025
उत्तराखंड4018
हरियाणा50-6025-35
छत्तीसगढ़42-4520-22
मध्य प्रदेश4020

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