इस साल पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल की थी।
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक इन राज्यों के चुनाव में राजनीतिक दलों ने कुल 470.101 करोड़ रुपये खर्च किए जिसमें से भाजपा ने अकेले ही 223.1148 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
यह कुल खर्च का 47 फीसदी है। हालांकि भाजपा ने इन चुनावों के लिए जितना फंड जुटाया था उसके मुकाबले खर्च बहुत कम था।
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा ने कुल 914.03 करोड़ रुपये इकट्ठे किए थे जिनमें से 90 फीसदी पार्टी के मुख्यालय द्वारा ही जुटाया गया था।
दूसरे नंबर पर कांग्रेस थी जिसने कुल 204.10 करोड़ का फंड इकट्ठा किया था। तीसरे नंबर पर तृणमूल कांग्रेस थी। इन दोनों ही पार्टियों ने कुल फंड केंद्रीय मुख्यालय के माध्यम से ही जुटाया था।
एडीआर ने जिन पार्टियों के बारे में अध्ययन किया उनमें, भाजपा, कांग्रेस. एनसीपी, एआईटीसी और सीपीआई शामिल हैं।
इसके अलावा क्षेत्रीय दलों में सीपीआई एमएल, AAP, आरएलडी, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, एआईएमआईएम और एनपीएफ शामिल थे।
13 राजनीतिक दलों ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, पंजाब और गोवा के विधानसभा चुनाव के दौरान कुल 1441 करोड़ रुपये का फंड इकट्ठा किया था जिसमें से 470 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 73 करोड़, पंजाब में 33 करोड़, उत्तराखंड में 33 करोड़, मणिपुर में 22 करोड़ और गोवा में लगभग 21 करोड़ रुपये खर्च किए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यालय स्तर पर जो भी कलेक्शन हुआ वह चेक और डीडी के रूप में प्राप्त हुआ था। वहीं 20 फीसदी फंड राज्य स्तर पर कलेक्ट किया गया था।
इन चुनावों में दूसरे नंबर पर कांग्रेस ने 102 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं तीसरे नंबर पर खर्च के मामले में बहुजन समाज पार्टी रही जिसने 68 करोड़ रुपये खर्च किए।
पार्टियों की राज्य इकाइयों की बात करें तो सभी दलों ने उत्तर प्रदेश से 88 क रोड़ रुपये इकट्ठा किए। राजनीतिक दलों ने कैश के रूप में केवल 28 करोड़ का फंड जुटाया।
एडीआर ने अपनी सिफारिश में कहा है कि सबी राजनीतिक दलों को अपने खर्च का पूरा ब्यौरा समय पर चुनाव आयोग के फॉर्मेट के मुताबिक दे देना चाहिए।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो जुर्माना लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा जो लोग दान करते हैं उनकी भी जानकारी देनी चाहिए।