टाटा संस के चेयरमैन ने दोबारा नियुक्ति के फैसले से इनकार कर दिया है। इस पर नोएल टाटा ने जानकारी देते हुए बताया,’दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश न करने का फैसला एन चंद्रशेखरन का अपना फैसला था।’ टाटा संस ने बताया कि बोर्ड ने 63 साल के टाटा संस चेयरमैन को अगले 5 साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने के पक्ष में वोट दिया है।
टाटा संस बोर्ड का ये फैसला एन. चंद्रशेखरन के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने डायरेक्टर्स से कहा था कि 20 फरवरी, 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर वो दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे। चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में अंतरिम चेयरमैन के तौर पर रतन टाटा की जगह ली थी और तब से वो टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं।
एन चंद्रशेखरन के 12 अगस्त को पद छोड़ने के फैसले का जिक्र करते हुए नोएल टाटा ने एक बयान में कहा, ‘यह उनका अपना फैसला था, ये फैसला उन्होंने अपनी मर्जी से लिया है। बोर्ड ने उनसे ऐसा करने के लिए नहीं कहा था, न ही यह बोर्ड के किसी प्रस्ताव का विषय था और न ही किसी समीक्षा प्रक्रिया का नतीजा था।’
कौन हैं नोएल टाटा ?
नोएल टाटा सार्वजनिक रूप से कम ही नजर आते हैं, लेकिन उन्होंने कई सालों तक ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों के बोर्ड में काम किया है। अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद ही वे एक अहम हस्ती के तौर पर सामने आए।
नोएल टाटा ‘टाटा ट्रस्ट्स’ के चेयरमैन हैं, जो चैरिटी करने वाली संस्थाओं का एक ग्रुप है और जिसके पास टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है। हालांकि टाटा ट्रस्ट्स ग्रुप के रोजमर्रा के कामकाज में कोई भूमिका नहीं निभाता, लेकिन पैरेंट कंपनी में उनकी हिस्सेदारी उन्हें ग्रुप के भविष्य पर निर्णायक असर डालने की ताकत देती है।
टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। यह 180 अरब डॉलर का ग्रुप है, जिसका कारोबार नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक फैला हुआ है।
चंद्रशेखरन के बाद कौन होगा अगला चेयरमैन ?
नोएल टाटा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस कंपनी के चेयरमैन का पद कंपनी के ही किसी डायरेक्टर के पास होता है। चेयरमैन का डायरेक्टर के तौर पर अपना पद अभी अनिश्चित है, क्योंकि जिस आम बैठक में इस सवाल पर फैसला होना था, वह कोरम न होने के कारण आगे नहीं बढ़ पाई। जब तक इस सवाल हल नहीं हो जाता, चेयरमैन पद पर कोई भी बात प्रस्ताव रखना मुश्किल होगा।
इसके बाद उन्होंने एक व्यवहारिक समस्या की ओर इशारा किया जिससे कंपनी कानूनी मुश्किल में पड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘मैं एक बात और बता दूं, अगर चेयरमैन पद को लेकर किसी ऐसे व्यक्ति का चुनाव किया गया जिसके डायरेक्टर बनने पर संदेह हो, तो कोई भी शेयर होल्डर इसे गंभीर कानूनी चुनौती दे सकता है।’
नोएल टाटा ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स ने एन चंद्रशेखरन के फैसले को स्वीकार कर लिया है, शेयरहोल्डर्स ने भी इस फैसले पर सहमति जता दी है। और अब आगे बढ़ने का समय आ गया है।