‘गुजरात के जोशीले, हिमाचल में पड़े ढीले’, पहाड़ी राज्य के चुनावी संग्राम में बैकफुट पर खेल रही ‘आम आदमी पार्टी’…

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में बमुश्किल कुछ महीने बचे हैं, ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी (AAP) पहाड़ी राज्य में अपना दमखम नहीं लगा रही है, पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में भाजपा के साथ चुनावी मुकाबले पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।

पंजाब चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद, AAP ने बड़ी जोर-शोर से हिमाचल प्रदेश में अपने अभियान को तेज कर दिया था।

न केवल वरिष्ठ नेताओं की रैलियां हुईं, बल्कि पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रोड शो भी किए।

आम आदमी पार्टी ने जिस तरह हिमाचल में अपने अभियान को रफ्तार दिया था, उसने कई लोगों को यह विश्वास दिलाया था कि वह न केवल मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस को पछाड़ सकती है, बल्कि सत्तारूढ़ जय राम ठाकुर सरकार के लिए एक कठिन चुनौती पेश कर सकती है।

लेकिन अपने वरिष्ठ नेता और हिमाचल चुनाव के लिए तत्कालीन प्रभारी सत्येंद्र जैन को कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद, आम आदमी पार्टी इस पहाड़ी राज्य में स्पष्ट रूप से बैकफुट पर चली गई है।

आम आदमी पार्टी नेतृत्व के इस बात पर जोर देने के बावजूद कि पूरा शीर्ष नेतृत्व हिमाचल पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, बाद में होने वाली घटनाओं से संकेत मिलता है कि गुजरात इसके लिए प्राथमिकता में उच्च स्थान पर है।

अरविंद केजरीवाल के कई दौर के प्रचार अभियान के अलावा, पार्टी अपने सभी संसाधनों को गुजरात में इस्तेमाल कर रही है।

वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा, जो पंजाब चुनाव के प्रभारी भी थे, उनको पार्टी के चुनाव अभियान के समन्वय के लिए गुजरात भेजा गया है। इस तरह आम आदमी पार्टी के हिमाचल अभियान की चमक फीकी पड़ती दिख रही है।

शीर्ष नेताओं के कुछ रोड शो को छोड़कर, हाल के हफ्तों में, यह AAP का स्थानीय नेतृत्व है जिसे हिमाचल चुनाव अभियान को संभालने का जिम्मा सौंपा दिया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही लोगों की प्रभावशाली उपस्थिति के साथ कुछ रैलियां कर चुके हैं और कांग्रेस भी प्रियंका गांधी जैसे स्टार प्रचारकों की बड़ी रैलियों की योजना बना रही है।

एक राजनीतिक विश्लेषक ने टिप्पणी की, ‘पंजाब की जीत के बाद AAP ने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी और मनीष सिसोदिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने जैसे कुछ उलटफेर के बाद, पार्टी धीमी पड़ गई।

इसके अलावा, गुजरात के चुनाव राजनीतिक और रणनीतिक रूप से छोटे हिमाचल प्रदेश की तुलना में AAP के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित प्रतीत होते हैं।’

हालांकि, आम आदमी पार्टी के हिमाचल मीडिया प्रभारी दीपक बाली ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों राज्य पार्टी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, ‘हिमाचल में चुनाव प्रचार के लिए पंजाब के नेताओं और मंत्रियों की एक सूची को अंतिम रूप दिया गया है।

गुजरात एक बड़ा राज्य है, जिसका मतलब है कि यहां प्रचार के लिए आने वाले नेताओं को अधिक समय राज्य में बिताना पड़ता है।

पंजाब के नेताओं के लिए हिमाचल प्रदेश की यात्रा करना आसान है।’ आपको बता दें कि गुजरात के साथ ही हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव इस साल दिसंबर में प्रस्तावित हैं।

निर्वाचन आयोग इस संबंध में कभी भी तारीखों का ऐलान कर सकता है। वर्तमान में गुजरात और हिमाचल प्रदेश, दोनों ही जगह भाजपा सत्ता में है।

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