कांग्रेस ने परिसीमन पर बातचीत से इनकार किया, सरकार ने संसद सत्र के लिए दिए संकेत…

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से परिसीमन (डिलिमिटेशन) के किसी नए प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग के कुछ दिनों बाद सरकार ने सोमवार को कहा कि उसने समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी (एसपी) सहित कई विपक्षी दलों से पहले ही बातचीत कर ली है।

सरकार ने कहा कि कांग्रेस की अपनी अनिच्छा के कारण उसके साथ बातचीत नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने इस चर्चा को फिर से हवा दे दी है कि इस कानून को लाने के लिए संसद का एक छोटा सत्र बुलाया जा सकता है।

‘कांग्रेस ने चर्चा के लिए नहीं दी कोई तारीख’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 16 अक्टूबर को लिखे गए खरगे के पत्र का कड़ा जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “जब बार-बार आग्रह करने के बावजूद कांग्रेस ने चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी तो सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किया। प्रस्तावित कानून के समर्थन में व्यापक सहमति बनाने के उद्देश्य से एसपी, डीएमके, वाईएसआरसीपी, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी सहित कई दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की गई।”

‘बार-बार क्यों कर रहे मा्ंग’

उन्होंने खरगे के सुझाव को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में यह समझ नहीं आता कि बार-बार परामर्श की मांग क्यों की जा रही थी। रिजिजू ने यहां पर यह दिखाने की कोशिश की कांग्रेस इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने विपक्ष के अन्य प्रमुख नेताओं से बातचीत की है, जबकि पिछले सत्र के दौरान जब वे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और खरगे से मिले थे तो उन्होंने चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी थी।

खरगे ने चिट्ठी में क्या कहा था?

पीएम मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने मानसून सत्र को सत्रावसान करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाया था। मानसून सत्र को 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था। रिजिजू ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कुछ पुराने उदाहरण दिए और स्पष्ट किया कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है जो यह तय करे कि सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने के बाद उसे कितने समय के भीतर सत्रावसान करना अनिवार्य हो।

रिजिजू ने कहा, “केवल इस बात से कि सदन का सत्रावसान नहीं किया गया है, अपने आप में कोई संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अनियमितता या अनुचित बात पैदा नहीं होती है।”‘बार-बार क्यों कर रहे मा्ंग’

उन्होंने खरगे के सुझाव को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में यह समझ नहीं आता कि बार-बार परामर्श की मांग क्यों की जा रही थी। रिजिजू ने यहां पर यह दिखाने की कोशिश की कांग्रेस इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने विपक्ष के अन्य प्रमुख नेताओं से बातचीत की है, जबकि पिछले सत्र के दौरान जब वे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और खरगे से मिले थे तो उन्होंने चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी थी।

खरगे ने चिट्ठी में क्या कहा था?

पीएम मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने मानसून सत्र को सत्रावसान करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाया था। मानसून सत्र को 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था। रिजिजू ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कुछ पुराने उदाहरण दिए और स्पष्ट किया कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है जो यह तय करे कि सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने के बाद उसे कितने समय के भीतर सत्रावसान करना अनिवार्य हो।

रिजिजू ने कहा, “केवल इस बात से कि सदन का सत्रावसान नहीं किया गया है, अपने आप में कोई संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अनियमितता या अनुचित बात पैदा नहीं होती है।”

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