
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह महिलाओं के अधिकारों के चैंपियन नहीं हैं, बल्कि “सिर्फ हिंदू विरोधी” हैं।
सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिलाओं के सशक्तीकरण के मुद्दे का उपयोग हिंदू धर्म को लक्षित और बदनाम करने के लिए एक सुविधाजनक धुंध के रूप में कर रहे हैं।
सरमा ने कहा,”इस पर विचार करें कि उन्होंने शरिया के तहत जारी पितृसत्तात्मक और मध्यकालीन प्रथाओं के खिलाफ कितनी बार इसी आक्रोश के साथ बात की है? कभी नहीं।” उन्होंने कहा, “जबकि शरिया इस्लामी न्यायशास्त्र की नींव है। मनुस्मृति का हिंदू धर्म में कोई तुलनीय शास्त्रीय अधिकार नहीं है। यह हिंदुओं के लिए एक सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी कोड भी नहीं है।”
सरमा ने पूछा, “राहुल गांधी कितनी बार मनुस्मृति पर हमला करते हैं और कितनी बार वह शरिया पर उसी उत्साह के साथ हमला करते हैं?”
उन्होंने दावा किया कि हिंदू धर्म की स्थायी शक्ति इसकी अद्वितीय क्षमता में है कि यह “विकसित, सुधारित और समय के साथ अनुकूलित होता है-जैसे कि यह सहस्त्राब्दियों से होता आया है और यह अनंत काल तक होता रहेगा।”
सरमा ने कहा,”इसलिए हर हिंदू को यह पूछना चाहिए कि राहुल गांधी का असली इरादा क्या है? महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करना या उन्हें हिंदू धर्म को बदनाम करने के बहाने के रूप में उपयोग करना?”
उल्लेखनीय है कि शनिवार को महाराष्ट्र में छात्राओं से बातचीत में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने “मनुस्मृति मानसिकता” की आलोचना की, “पितृसत्ता को तोड़ने” का आग्रह किया और कहा कि महिलाएं अपने लिए हैं, न कि अपने पिता, पति या बेटों के लिए।