
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मंगलवार को पत्रकार तरुण तेजपाल की उस अर्जी पर विचार करेगा जिसमें उन्होंने समर्पण से छूट की मांग की है।
छह अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
जस्टिस आलोक अराधे की एकल पीठ ने कहा कि तेजपाल के वकील कपिल सिब्बल ने छूट की अर्जी के गुण-दोष पर कोर्ट के सामने अपनी बात नहीं रखी है।
पीठ ने कहा, “उन्हें इस याचिका (अंतरिम आवेदन) पर कोर्ट के सामने अपनी बात रखने का मौका देने के लिए इसे 25 अगस्त को विचार के लिए सूचीबद्ध किया जाए।” शुरुआत में सिब्बल ने कहा कि समर्पण से छूट की अर्जी को 31 अगस्त को कोर्ट के सामने सूचीबद्ध किया जाए।
गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2013 के नियमों के तहत जब तक तेजपाल समर्पण नहीं करते, तब तक उनकी मुख्य अपील नियमित अदालत के समक्ष सूचीबद्ध नहीं की जा सकती।
पीठ ने मयूरम सुब्रमण्यन श्रीनिवासन बनाम सीबीआई केस में कोर्ट के 2006 के फैसले का जिक्र किया और कहा कि अपील पर सुनवाई से पहले समर्पण करना जरूरी है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, “इसलिए, जब तक समर्पण से छूट की अर्जी पर उचित आदेश पारित नहीं हो जाते, तब तक अपील को कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता। इसलिए, समर्पण से छूट की अर्जी पर विचार किए बिना मामले को कोर्ट के सामने सूचीबद्ध करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।”