पेट के कैंसर के गंभीर मरीजों के लिए नई दवा उम्मीद जगा रही है। ट्रायल के दौरान दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका की दवा ‘सोने-वी’ से एटवांस स्टेज के पेट के कैंसर के मरीजों की औसत जीवित रहने की अवधि दोगुनी होकर 10 महीने पहुंच गई।
रविवार को जारी अंतिम चरण के परीक्षण के नतीजों के अनुसार, दवा लेने वाले मरीजों में मौत का जोखिम कीमोथेरेपी की तुलना में 53 प्रतिशत कम रहा। 532 मरीजों पर हुए अध्ययन में उन लोगों को शामिल किया गया था, जिन्हें पहले कम से कम दो उपचार दिए जा चुके थे।
बढ़ी जीवित रहने की अवधि
दवा लेने वालों की औसत जीवित रहने की अवधि 10 महीने रही, जबकि डॉक्टरों की पसंद वाली कीमोथेरेपी लेने वालों में यह पांच महीने थी। हालांकि, बीमारी बढ़ने से मुक्त रहने की अवधि के दूसरे प्रमुख लक्ष्य पर दवा सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नतीजा हासिल नहीं कर सकी।
एस्ट्राजेनेका की अधिकारी सुसान गैलब्रेथ के मुताबिक, यह सुधार ऐसे मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनका इलाज मुश्किल है। दवा ‘एंटीबाडी-ड्रग कंजुगेट’ (एडीसी) वर्ग की है, जो कैंसर कोशिकाओं तक दवा पहुंचाने के लिए बनाई जाती है।
परीक्षण में कौन से मरीज हुए शामिल
परीक्षण में उन मरीजों को शामिल किया गया, जिनके ट्यूमर की कम से कम 25 प्रतिशत कोशिकाओं में क्लाउडिन 18.2 प्रोटीन मौजूद था। कंपनी का मानना है कि इस सीमा से अधिक मरीजों को इलाज मिल सकता है। हालांकि, दवा के पेट संबंधी दुष्प्रभाव कीमोथेरेपी से अधिक देखे गए। शुरुआती चरण के इलाज में इसकी उपयोगिता जांचने के लिए 2,000 से अधिक मरीजों पर एक अन्य अध्ययन चल रहा है।