क्या टूट जाएगा ट्रंप का ग्रीनलैंड सपना? यूरोपीय देशों के दबाव में अमेरिका की बोलती बंद, पीछे हटता दिखा US…

यूक्रेन को लेकर पैदा हुई असहमतियों ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका और यूरोप के बीच अविश्वास की गहरी लकीर खींच दी है। यूरोप ने अब अमेरिका के साथ चापलूसी भरा व्यवहार न करने, हर कार्य में साथ देने और अमेरिका की सरपरस्ती वाली कूटनीति में साथ न देने का फैसला किया है।

यूरोप की तीन बड़ी ताकतों- ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने खुद को मजबूत करना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता के मामले में ब्रिटेन नरम रुख नहीं दिखाएगा। ऐसे ही तेवर अन्य यूरोपीय देशों के नेताओं के हैं।

यूरोपीय देशों ने किया साफ

यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड के मसले पर वे ब्लैकमेल नहीं होंगे। नार्वे के प्रधानमंत्री यूनोस गाफ्टर ने कहा है कि सहयोगियों के बीच धमकियों के लिए कोई स्थान नहीं होता है, इसलिए अमेरिका की किसी तरह की धमकी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जबकि डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिक्सन ने कहा, जब यूरोप नहीं बंटेगा और वह एकजुटता के साथ खड़ा रहेगा, तो उसका नतीजा भी दिखाई देगा।

वह एकजुटता हम सभी को मजबूत करने वाली होगी। हाल के हफ्तों में हमने बहुत कुछ सीखा है।

फ्रेडरिक्सन ने कहा, हम बुरे सहयोगी नहीं हैं लेकिन हर बात को मानना हमने बंद कर दिया है। फ्रेडरिक्सन ने यह बात अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के जवाब में कही है जिसमें वेंस ने डेनमार्क को अच्छा सहयोगी नहीं बताया है।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी अमेरिका में अपने क्षेत्र के विलय से सख्ती से इन्कार कर दिया है। वहां की जनता ने भी सामने आकर ग्रीनलैंड स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे के सामने प्रदर्शन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ट्रंप के बीच इस दौरान सबसे ज्यादा तल्खी पैदा हुई है।

माना जा रहा है यूरोप की इसी एकजुटता के चलते ट्रंप ने ग्रीनलैंड मामले में अपने पैर पीछे खींचे हैं और अब वह उसे पाने के लिए सैन्य शक्ति के इस्तेमाल की बात नहीं कह रहे हैं, वह यूरोप की सुरक्षा का हवाला दे रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *