क्या यूनुस की नीति अपनाएंगे तारिक रहमान? पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर बांग्लादेश की क्या है रणनीति…

तारिक रहमान के बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बीच क्षेत्रीय कूटनीति में नई हलचल देखी जा रही है। खास तौर पर बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विश्लेषकों की नजरें टिक गई हैं।

पिछले लगभग डेढ़ वर्ष के दौरान पाकिस्तान ने बांग्लादेश में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए सक्रिय प्रयास किए और अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के साथ सहयोग बढ़ाकर संबंधों में नरमी लाने की कोशिश की।

यूनुस पर लगे आरोप?

यूनुस पर यह आरोप भी लगे कि उन्होंने पाकिस्तान को अपेक्षाकृत अधिक प्राथमिकता दी। समुद्री आवाजाही से जुड़े कुछ नियमों में ढील दिए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई थी कि इस रास्ते का दुरुपयोग अस्थिरता फैलाने वाले तत्व कर सकते हैं।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देखें तो 2001 से 2007 के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जमात-ए-इस्लामी के साथ मिलकर सत्ता संभाली थी। उस दौर में भारत-बांग्लादेश संबंधों में उतार-चढ़ाव बना रहा और भारत की ओर से कट्टरपंथी तत्वों को संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए जाते रहे।

पाकिस्तान से दूरी बनाएगी BNP?

हालांकि वर्तमान स्थिति कुछ भिन्न मानी जा रही है, क्योंकि इस बार जमात-ए-इस्लामी बीएनपी की औपचारिक सहयोगी नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बीएनपी पूरी तरह पाकिस्तान से दूरी बनाए रखेगी, यह मान लेना जल्दबाजी होगी।

विश्लेषकों के अनुसार, अंतरिम शासन के दौरान खुफिया नेटवर्क की सक्रियता ने जटिलताएं बढ़ाई हैं, जिन पर नई सरकार को संतुलित ²ष्टिकोण अपनाना होगा।पिछले डेढ़ वर्षों में पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया अधिकारियों के कई दौरों की चर्चा भी सामने आई है।

इस अवधि में सुरक्षा सहयोग और सैन्य समझौतों को लेकर बातचीत तेज होने की बात कही जाती रही है। कुछ सुरक्षा सूत्रों का मत है कि इन संपर्कों के पीछे सामरिक हित प्रमुख रहे हैं, जबकि आलोचक इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिये से देखते हैं। विदेश नीति को लेकर तारिक रहमान के बयानों ने अपेक्षाकृत व्यावहारिक रुख का संकेत दिया है।

रहमान के मन में क्या है?

चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित हैं, न कि किसी बाहरी शक्ति का पक्ष। उन्होंने अतीत के विवादों और वैचारिक टकरावों से दूरी बनाते हुए संतुलित कूटनीति पर जोर दिया।

जानकारों का मानना है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में संतुलन कायम रखते हुए आंतरिक स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी, ताकि क्षेत्रीय राजनीति में बांग्लादेश की स्वतंत्र और व्यावहारिक छवि मजबूत हो सके।

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