प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
हिंदू धर्म में रंगों का केवल सुंदरता से संबंध नहीं है, बल्कि हर रंग एक विशेष ऊर्जा, गुण और संदेश का प्रतीक है। आपने अक्सर देखा होगा कि माँ दुर्गा हमेशा चटक लाल रंग की साड़ी में नजर आती हैं।
वहीं, विद्या की देवी मां सरस्वती दूध जैसी सफेद साड़ी धारण करती हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इन रंगों के पीछे बहुत गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
मां दुर्गा को ‘शक्ति’ का साक्षात स्वरूप माना जाता है। लाल रंग ऊर्जा, साहस, जोश और विजय का प्रतीक है। शास्त्र बताते हैं कि लाल रंग हमारे भीतर के ‘तमस’ (अंधकार) को मिटाकर ‘रजस’ (क्रियाशीलता) को जाग्रत करता है।
मां दुर्गा के लाल रंग का महत्व
धार्मिक शास्त्र के अनुसार, मां दुर्गा असुरों का संहार करने वाली वीरांगना हैं। युद्ध और शौर्य के लिए जिस अग्नि और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, लाल रंग उसे ही दर्शाता है।
भारतीय परंपरा में लाल रंग को सबसे शुभ माना गया है चाहे वह सुहाग का सिंदूर हो या पूजा का तिलक। यही कारण है कि कल्याणकारी देवी दुर्गा को लाल रंग अत्यंत प्रिय है और उन्हें गुड़हल के लाल फूल चढ़ाने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
मां सरस्वती और सफेद रंग
दूसरी ओर, मां सरस्वती ज्ञान, कला और संगीत की देवी हैं। उनका स्वरूप पूरी तरह सात्विक है। सफेद रंग शुद्धता, शांति, पवित्रता और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफेद रंग ‘सत्व गुण’ को दर्शाता है। जिस प्रकार सफेद रंग पर कोई दाग तुरंत दिख जाता है। वैसे ही ज्ञान का मार्ग भी बिल्कुल साफ और निष्कलंक होना चाहिए।
मां सरस्वती का सफेद वस्त्र यह संदेश देता है कि जो जातक विमल बुद्धि (शुद्ध बुद्धि) और प्रज्ञा प्राप्त करना चाहते हैं। उन्हें अपने मन को सफेद रंग की तरह निर्मल रखना होगा।
वह एकाग्रता और मानसिक शांति की देवी हैं, इसलिए उनका पूरा परिवेश चाहे वह उनका वाहन हंस हो या उनका आसन कमल सब सफेद होता है।
धर्म और विज्ञान का मेल
धर्मशास्त्रों के साथ-साथ विज्ञान भी मानता है कि रंगों का हमारे मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है। लाल रंग संचार और उत्साह बढ़ाता है। वहीं, सफेद रंग (White Color) तनाव कम कर एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। यही कारण है कि शक्ति की उपासना में लाल और ज्ञान की साधना में सफेद रंग का महत्व बताया गया है।