कांग्रेस की इतनी हैसियत नहीं, लद्दाख हिंसा पर बयान क्यों दिया सोनम वांगचुक ने…

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को भड़की हिंसा ने राजनीतिक रंग ले लिया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस हिंसा के पीछे कांग्रेस की साजिश बताई है और आरोप लगाया है कि यह सब कांग्रेस के कुप्रयास का हिस्सा है।

वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस की इतनी हैसियत नहीं है कि वह हजारों युवाओं को सड़कों पर ला सके।

भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद स्टानजिन त्सेपांग ने इस हिंसा को भड़काया।

उन्होंने कहा कि आज लद्दाख में यह दिखाने की कोशिश हुई कि आंदोलन का नेतृत्व ‘जेनरेशन Z’ कर रही है, लेकिन जांच में पता चला कि यह कांग्रेस का आंदोलन था।

संबित पात्रा ने दावा किया कि ऊपरी लेह वार्ड से कांग्रेस पार्षद स्टानजिन त्सेपांग हथियार लेकर भाजपा कार्यालय की ओर मार्च करते दिखे।

उन्होंने कहा, “उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिसमें वह भीड़ को उकसा रहे हैं और भाजपा कार्यालय पर निशाना साध रहे हैं। यह राहुल गांधी के साथ खड़े हैं।”

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस पार्षद हिंसा और उपद्रव में शामिल थे और भाजपा कार्यालय व हिल काउंसिल को निशाना बना रहे थे।

हिंसा में 4 की मौत, 80 घायल

लेह में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हिंसक हुईं। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर निकले प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। अर्धसैनिक बलों की गाड़ी और भाजपा कार्यालय को आग के हवाले कर दिया।

पुलिस ने स्थिति को काबू करने के लिए गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे, साथ ही लाठीचार्ज भी किया। इस दौरान 80 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल चार लोगों की बाद में मौत हो गई।

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इन झड़पों को साजिश करार देते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने इस मामले में कांग्रेस पार्षद त्सेपांग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

क्या बोले सोनम वांगचुक?

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भाजपा के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कांग्रेस की इतनी पकड़ लद्दाख में नहीं है कि वह 5,000 युवाओं को सड़क पर उतार सके।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस के एक पार्षद ने गुस्से में अस्पताल का दौरा किया क्योंकि उनके गांव के दो लोग घायल थे, लेकिन इससे यह कहना कि कांग्रेस ने हिंसा कराई, सही नहीं है।”

वांगचुक ने हिंसा की घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा कि असली वजह युवाओं में पनप रही नाराजगी और निराशा है। उन्होंने कहा, “पिछले पांच सालों से शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहा था, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

गृह मंत्रालय ने बातचीत के लिए 6 अक्तूबर की तारीख दी थी, जिससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया।”

उनके अनुसार, इस बार हजारों युवाओं अचानक सड़कों पर उतर आए। उन्होंने बताया कि मंगलवार को 72 वर्षीय एक बुजुर्ग और 62 वर्षीय एक महिला के घायल होने और अस्पताल में भर्ती होने की घटना शायद हिंसा का तत्काल कारण बनी।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग तेज रही है।

लद्दाख में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूह इस मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।

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