यूक्रेन से लेकर इजरायल तक की मदद को आगे आने वाले अमेरिका के भंडार में ही हथियारों की कमी हो गई है।
इसके चलते अमेरिका ने यूक्रेन को की जाने वाली हथियारों की डिलिवरी पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
अमेरिका के भंडार में कई जरूरी हथियारों का स्टॉक कम हो गया है, जिनमें ऐंटी-एयर मिसाइल भी शामिल है।
पेंटागन ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका प्रथम की नीति के तहत हमें यूक्रेन को हथियारों की डिलिवरी रोकनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे पास ही स्टॉक में हथियारों की कमी हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का डिफेंस रिव्यू विभाग समय-समय पर देखता है कि हथियारों का स्टॉक कितना है।
अमेरिकी स्टॉक में जिन हथियारों की कमी हुई है, उनमें लॉन्ग रेंज की मिसाइलें, 155 एमएम आर्टिलरी शेल्स और ऐंटी एयर मिसाइलें शामिल हैं।
रूस के हवाई हमलों से बचाव के लिए अमेरिका ने बड़े पैमाने पर इन हथियारों का निर्यात यूक्रेन को किया था। अब उसके पास ही इनका स्टॉक कम होता दिख रहा है तो सप्लाई को रोक दिया है।
बीते सप्ताह भी डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के एक पत्रकार से बातचीत में कहा था कि यूक्रेन के बचाव के लिए मिसाइलों का निर्यात किया जाएगा। पैट्रियट मिसाइलों को भेजने का वादा किया गया था, लेकिन अब अमेरिका में ही इनकी कमी पाई गई है।
ऐसी स्थिति में पेंटागन का कहना है कि अमेरिका फर्स्ट की नीति के तहत हम हथियारों की सप्लाई रोकेंगे।
बता दें कि अमेरिका ने नाटो की मीटिंग में भी सदस्य देशों से कहा था कि वे अपना रक्षा बजट बढ़ाएं और अपनी सुरक्षा के लिए हर वक्त अमेरिका पर ही निर्भर न रहें। इसी के चलते नाटो देशों ने अपनी जीडीपी का 5 फीसदी हिस्सा हथियारों पर खर्च करने का फैसला लिया है।
नाटो देशों को बढ़ाना रक्षा खर्च, ट्रंप ने कहा था- हम कब तक उठाएं बोझ
बता दें कि अब तक इन देशों का रक्षा खर्च जीडीपी के 2 फीसदी से भी कम था। इसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने ऐतराज जताया था और कहा था कि आपके हिस्से का रक्षा खर्च आखिर कब तक अमेरिका करता रहेगा।
नाटो के अन्य देशों को भी योगदान करना चाहिए और अपनी सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर होना चाहिए। पेंटागन का कहना है कि बाइडेन प्रशासन के 4 सालों में भी हमने हथियारों का निर्यात लगातार जारी रखा।
यूक्रेन को जंग की शुरुआत से ही हथियार दिए जा रहे हैं। ऐसे में अब समीक्षा करने की जरूरत है।