रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे जस्टिस ओका? CJI गवई ने सबके सामने किया खुलासा…

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अभय एस ओका कल (शनिवार, 24 मई को) रिटायर हो रहे हैं।

आज उनका अंतिम कार्य दिवस था। इस मौके पर उन्हें चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सेरिमोनियल बेंच में विदाई दी गई।

इस दौरान जस्टिस गवई ने कहा कि वे और जस्टिस ओका पिछले 40 सालों से मित्र हैं। दोनों ने एकसाथ GLC में लॉ की पढ़ाई की है।

इससे पहले दोनों बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत भी कर चुके हैं। जस्टिस ओका अपनी कर्तव्यनिष्ठा और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। आज भी उन्होंने परंपरा को तोड़ते हुए आखिरी कार्यदिवस पर कुल 11 फैसले सुनाए।

जस्टिस गवई ने कहा कि जस्टिस ओका के दिए फैसलों में छिपे उनका न्यायपालिका के प्रति योगदान झलकता है। उन्होंने कहा कि जस्टिस ओका न्यायालय में कानून और नैतिकता दोनों के प्रोफेसर रहे हैं।

उन्होंने हमेशा याद दिलाया है कि वकील न्यायालय के पहले अधिकारी हैं। जस्टिस गवई ने कहा, “उनकी दृढ़ता के पीछे एक शिक्षक का समर्पण छिपा है।

उनके न्यायालय ने हमेशा नैतिक वकालत को प्रोत्साहित किया। इन वर्षों में जिस ऊर्जा के साथ उन्होंने काम किया, वह सराहनीय है। जब वे न्यायाधीश बने तो उन्होंने आधिकारिक आवास भी नहीं लिया।”

दृढ़ इच्छाशक्ति दिवंगत मां से विरासत में मिली

CJI गवई ने कहा, “औरंगाबाद में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लाने के लिए मुझे उनका धन्यवाद करना चाहिए। पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाती है कि अपूरणीय क्षति को रोकने के लिए कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं।

मैंने मराठी समाचार पत्रों में पढ़ा कि दृढ़ निश्चय और दृढ़ इच्छाशक्ति की गुणवत्ता उन्हें अपनी दिवंगत मां से विरासत में मिली है।

आज मै बार और बेंच के सभी सदस्यों से कहता हूं कि आइए हम कानून और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों के प्रति उनके अथक योगदान को याद करें। मुझे सुप्रीम कोर्ट में उनकी उपस्थिति की बहुत याद आएगी।”

रिटायरमेंट के बाद दोनों एकसाथ करेंगे काम

इसके साथ सीजेआई गवई ने कहा कि हम दोनों ने फैसला किया है कि रिटायरमेंट के बाद हम दोनों कोई भी पद स्वीकार नहीं करेंगे। लगे हाथ सीजेआई ने यह भी बताया कि दोनों रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे।

उन्होंने कहा कि हम दोनों सेवानिवृत्ति के बाद एक साथ काम कर सकते हैं। बता दें कि इसी साल नवंबर में सीजेआई गवई भी रिटायर हो रहे हैं।

उनका कार्यकाल छह महीने का ही होगा। वह इसी महीने 14 मई को जस्टिस संजीव खन्ना के रिटायर होने के बाद देश के मुख्य न्यायाधीश बने थे।

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